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Mau News: ढाई दशक से जंग खा रही हैं सरकारी कोल्ड स्टोरेज की मशीनें, किसान परेशान

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जमालपुर शीतगृह वर्षो से जंग खा रही मशीन। संवाद
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घोसी तहसील क्षेत्र के सेमरी जमालपुर में आलू भंडारण के लिए बनाए गए सरकारी कोल्ड स्टोरेज की मशीनें ढाई दशक से जंग खा रही हैं। इससे क्षेत्र के सब्जी उत्पादकों, विशेषकर आलू किसानों के सामने गंभीर समस्या बनी हुई है।
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सेमरी जमालपुर और टड़ियांव का कोल्ड स्टोरेज करीब ढाई दशक पहले पीसीएफ द्वारा संचालित किया जाता था। शुरुआती वर्षों में किसानों को इसका लाभ मिला, लेकिन बाद में यह बंद हो गया।
इसके चलते किसान हर साल भंडारण के लिए परेशान होते हैं और मजबूरी में पड़ोसी जिलों के निजी कोल्ड स्टोरेज का रुख करते हैं। करीब 30 वर्ष पहले क्षेत्र के किसानों की सुविधा के लिए सेमरी जमालपुर में 40 हजार क्विंटल और टड़ियांव में 38 हजार क्विंटल क्षमता के कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए गए थे।
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लगभग पांच से छह वर्ष तक किसानों को इसका लाभ मिला, इसके बाद दोनों बंद हो गए।

किसान लगातार उठा रहे मांग
किसान नेता शिवमुनि ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर से शासन को पत्र लिखकर कोल्ड स्टोरेज चालू कराने की मांग की, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। किसान सुभाष प्रजापति ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज बंद होने से अब कई किसान आलू उत्पादन से दूर हो रहे हैं। उत्तम यादव ने बताया कि किसी भी स्तर पर किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हरेंद्र सिंह ने कहा कि भंडारण की सुविधा न होने से किसान उत्पादन कम करने को मजबूर हैं। अभिषेक चौधरी ने बताया कि फसल तैयार होने के बाद किसानों को कोल्ड स्टोरेज की तलाश में भटकना पड़ता है। संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि क्षेत्र में केवल अलीनगर का एक कोल्ड स्टोरेज चालू है, जिसकी क्षमता 900 मीट्रिक टन है, जो उत्पादन के मुकाबले काफी कम है। दीपक यादव ने बताया कि भंडारण की सुविधा न होने से किसानों को मजबूरी में आलू औने-पौने दाम में बेचना पड़ता है। कमलेश राय ने कहा कि शीतगृह बंद होने से रखरखाव के दौरान बड़ी मात्रा में आलू सड़कर खराब हो जाता है, जिससे लागत भी नहीं निकल पाती।

कोट-
दोनों कोल्ड स्टोरेज के संचालन के लिए शासन स्तर पर उन्हें किराए पर चलाने की योजना है। टेंडर भी प्रकाशित किया गया था, लेकिन कोई आगे नहीं आया। अब दोनों जगहों पर पुरानी मशीनें हटाकर आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी।
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-रमेश गुप्ता, जिला प्रबंधक, पीसीएफ
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