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घोसी उपचुनाव: सपा के लिए सीट बरकरार रखने की चुनौती, BJP के लिए प्रतिष्ठा का विषय, क्या कहते हैं सियासी समीकरण?

Mon, 14 Aug 2023 05:17 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मऊ

सार

Ghosi By Election 2023:  भाजपा ने घोसी विधानसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव में दारा सिंह चौहान को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। विधानसभा चुनाव 2022 में दारा सिंह चौहान ने इसी सीट पर समाजवादी पार्टी से जीत दर्ज की थी। घोसी उपचुनाव के नतीजे भाजपा और सपा के लिए काफी अहम हैं।
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सुधाकर सिंह और दारा सिंह चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट इन दिनों चर्चा में है। विधानसभा चुनाव 2022 को बमुश्किल एक साल से अधिक समय बीता नहीं था कि इसी सीट पर अब पांच सितंबर को उपचुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव इस लिए भी खास होने जा रहा है कि यहां से 2022 में चुनाव जीत चुके दारा सिंह चौहान इस बार भाजपा से मैदान में हैं। 2022 में उन्होंने इसी सीट से सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। अब यह भविष्य तय करेगा कि क्या दारा सिंह चौहान इसी सीट से दोबारा अपनी जीत कायम रख पाएंगे या जनता उन्हें नकार देगी।

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सपा ने पूर्व विधायक सुधाकर सिंह पर दांव खेला है। कहा जाता है कि 2022 के चुनाव में भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान के लिए सपा ने सुधाकर सिंह का टिकट काट दिया था। ऐसे में एक बार से फिर से उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। घोसी उपचुनाव के नतीजे भाजपा और सपा के लिए काफी अहम है। 
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राजभर मतदाता निभाएंगे निर्णायक भूमिका 

सपा के सामने घोसी सीट बरकरार रखने की चुनौती है। इस सीट पर राजभर मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। पिछली बार सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर सपा के साथ थे, जबकि इस बार वह भाजपा के पाले में आ चुके हैं। दारा सिंह चौहान की नोनिया जाति के भी मतदाता यहां निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं।

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सपा यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश करेगी कि दारा सिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर के साथ छोड़ने के बावजूद वह यहां मजबूत है, जबकि भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा से जुड़ी है। इससे यह भी पता चलेगा कि पूर्वांचल के इन दोनों कद्दावर नेताओं के साथ आने का भाजपा को कितना फायदा मिला।

कौन हैं सुधाकर सिंह

घोसी में मतदान 5 सितंबर और मतगणना 8 सितंबर को होगी। सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह दो बार पहले भी विधायक रह चुके हैं। वह वर्ष 1996 में नत्थूपुर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। परिसीमन के बाद इस सीट का नाम बदलकर घोसी कर दिया गया। 2012 के चुनाव में भी सुधाकर सिंह यहां से जीते। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा ने सुधाकर सिंह को एक बार फिर टिकट दिया, लेकिन इस बार भाजपा के प्रत्याशी फागू सिंह चौहान ने उन्हें शिकस्त दे दी।
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वर्ष 2020 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में भी सुधाकर सिंह को पराजय मिली। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा छोड़कर सपा में आए तत्कालीन कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को पार्टी ने यहां से लड़ाया। हाल ही में दारा सिंह चौहान अपनी विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र भाजपा में शामिल हुए। अब भाजपा ने उन्हें यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है।
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