सपा यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश करेगी कि दारा सिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर के साथ छोड़ने के बावजूद वह यहां मजबूत है, जबकि भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा से जुड़ी है। इससे यह भी पता चलेगा कि पूर्वांचल के इन दोनों कद्दावर नेताओं के साथ आने का भाजपा को कितना फायदा मिला।
घोसी में मतदान 5 सितंबर और मतगणना 8 सितंबर को होगी। सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह दो बार पहले भी विधायक रह चुके हैं। वह वर्ष 1996 में नत्थूपुर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। परिसीमन के बाद इस सीट का नाम बदलकर घोसी कर दिया गया। 2012 के चुनाव में भी सुधाकर सिंह यहां से जीते। वर्ष 2017 के चुनाव में सपा ने सुधाकर सिंह को एक बार फिर टिकट दिया, लेकिन इस बार भाजपा के प्रत्याशी फागू सिंह चौहान ने उन्हें शिकस्त दे दी।
वर्ष 2020 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में भी सुधाकर सिंह को पराजय मिली। वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा छोड़कर सपा में आए तत्कालीन कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को पार्टी ने यहां से लड़ाया। हाल ही में दारा सिंह चौहान अपनी विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र भाजपा में शामिल हुए। अब भाजपा ने उन्हें यहां से अपना प्रत्याशी बनाया है।