इस बीच हाईटेंशन तारों की जद में आने से सबसे पहले बस चला रहा जगरनाथ जद में आया। जहां उसने करंट से तड़पते हुए सवार लोगों को बस से जल्द उतरने के लिए भागो भागो की आवाज दी। आवाज सुनते ही चालक के बगल वाली सीट पर बैठी खुशी की मां ने उसे भागने के लिए कहते हुए आगे के दरवाजे से निकलने की कोशिश की, लेकिन वह निकल नहीं सकी। वहीं खुशी खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई।
मां की बनारसी साड़ी से की पहचान
हादसे में मृत कालिंदी की बड़ी बेटी ज्योती जो घटना के समय अपने चाचा गांधी के साथ स्कूटी से बस के पीछे- पीछे जा रही थी। उसने बताया कि हादसे के बाद वह अपनी मां-बहन को खोज रही थी। छोटी बहन को सुरक्षित पाकर वह खुश थी, लेकिन एक शव को देखकर वह खुद का संयम खो बैठी। क्योंकि वह उसकी मां थी, जिसकी पहचान उसने उसकी हरी बनारसी साड़ी से की, जिसे उसने बड़े अरमान से पहनाकर इस शादी में शामिल होने के लिए भेजा था