घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नदी खतरे के निशान से 20 सेमी नीचे बह रही है। बाढ़ के खतरे और कटान को लेकर तटवर्ती इलाके लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। वहीं नदी के रौद्र रूप से कस्बा सहित ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा पैदा हो गया है। रविवार को नदी के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई।
नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। कटान पीड़ितों के अनुसार, जब-जब नदी का जलस्तर घटता बढ़ता है तब-तब नदी तबाही मचाती है। रविवार को नदी के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी का जलस्तर 69.70 मीटर रहा। जबकि शनिवार को जलस्तर 69.65 मीटर पर था। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है।
नदी खतरा निशान से मात्र 20 सेमी नीचे बह रही है। मुक्तिधाम पर स्थित शवदाह घाट पर घाघरा की तेज लहरे टक्कर मार रही है, जिससे घाट पर कभी भी कटान हो सकती है। नदी का दबाव खाकी बाबा की कुटी और जानकी घाट पर बढ़ गया है।
घाघरा का पानी धीरे-धीरे धनौली लोहडा बांध तथा नौली चिउटीडाड की तरफ बढ रहा है। नौली चिउटीडाड़ बंधे पर पानी का दबाव बढ रहा है। नदी के बढ़ने से नगर स्थित मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर,ा डीहबाबा का जमंदिर, खाकी बाबा की कुटी, लोक निर्माण विभाग का डाक बंागला सहित ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है। सिचाई विभाग की तरफ से नगर के ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।