जिले के प्राथमिक विद्यालयों में समायोजन के बाद तैनात शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय पर भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से शिक्षामित्रों से विकल्प मांगा गया था। बीएसए ने जांच पड़ताल कर 1063 शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय पर भेजने के आदेश पर मुहर लगाई है। नई व्यवस्था से शिक्षामित्रों को घर के पास ही स्कूल में पढ़ाने का मौका मिलेेगा। इससे शिक्षामित्रों में खुशी है।
जिले के 1060 प्राथमिक विद्यालयों में 1707 शिक्षामित्रों की तैनाती की गई थी। सपा शासनकाल में दो चरणों में लगभग 1350 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजन कर जिले के विभिन्न ब्लाकों के विद्यालयों पर तैनात किया गया था। शासन से शिक्षामित्रों को शिक्षकों के समान वेतन दिया जाने लगा था। सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद इनकी नौकरी खत्म कर दी गई थी।
ऐसी तमाम अड़चनों की बाधा पार करते हुए मौजूदा समय में दूसरे ब्लाकों के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्र10 हजार रूपये की मानदेय पर नौकरी कर रहे हैं। कम मानदेय पर काफी दूरी पर स्थित विद्यालयों में अध्यापन कार्य करने में असमर्थता व्यक्त करते हुए शिक्षामित्रों ने विभागीय अधिकारियों के साथ शासन से गुहार लगाई थी। शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षामित्रों से विकल्प मांगा था। जांच पड़ताल के बाद बीएसए ने 1063 शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय या सुविधानुसार विद्यालयों पर भेजने के आदेश पर मुहर लगा दी है। मूल विद्यालय या सुविधा के अनुसार विद्यालय मिलने से शिक्षामित्र संगठन के पदाधिकारियों तथा शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
उनका कहना है कि देर से ही सही लेकिन सरकार ने निर्णय लिया। शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रामकेवल यादव का कहना है कि समायोजन के बाद शिक्षामित्रों को घर से 40 से 45 किमी दूर विद्यालयों पर तैनाती कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कम मानदेय पर अध्यापन कार्य मुश्किल हो रहा था। शासन से लड़ी जा रही लड़ाई का एक राहत भरा कदम है। लेकिन आंदोलन जारी रहेगा।