जिला अस्पताल में मरीजों के उपचार में खिलवाड़ के साथ सुविधा के नाम पर धनउगाही आम बात हो चुकी है। इसे लेकर सैकड़ों शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति कर दी जाती है। आलम यह है कि लोग चिकित्सक और कर्मियों की पैसा वसूली को आम बात समझ चुके हैं। अब जिला अस्पताल में पिछले दो माह से रोगी कल्याण समिति के मद में अर्जित धन को जमा नहीं कराया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में अभी तक जितनी धनराशि जमा होनी चाहिए वह नहीं हो सकी है। आमतौर पर अस्पताल में प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये रोगी कल्याण समिति के मद में जमा कराया जाता है। इसमें ओपीडी की पर्ची का सबसे कम करीब 19 हजार रुपये और सबसे ज्यादा पैसा ब्लड बैंक से करीब 60 हजार रुपये प्रतिमाह जमा होता है। बता दें के इसके पूर्व भी निवर्तमान सीएमएस डॉ. नाहिदा खातून के प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में स्थानांतरण के तुरंत बाद भी रोगी कल्याण समिति के मद में जमा 23 लाख रुपये में से एक माह के भीतर 19 लाख रुपये खर्च कर दिए गए थे। मामले को अस्पताल प्रशासन द्वारा दबा दिया गया था। हालांकि अस्पताल में कई तरह की चर्चा भी होने लगी थी। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि बाबुओं द्वारा रोगी कल्याण समिति के मद के पैसे का अनियमित तरीके से फर्मों से कमीशन लेकर भुगतान कर दिया गया था। मद में कम पैसा होने पर जुलाई माह में पांच लाख रुपये जमा कराए गए। अब एक बार फिर से दो माह से पैसा जमा नहीं कराया गया है।
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क्या है रोगी कल्याण समिति
रोगी कल्याण समिति में यूजर चार्ज जिसमें मरीज की पर्ची, ईसीजी का चार्ज, प्लास्टर का चार्ज, ब्लड बैंक से अर्जित धन आदि को शामिल किया गया है। मरीज के उपचार कराने के दौरान उसके द्वारा पर्ची कटाने से लेकर ईसीजी, प्लास्टर और ब्लड बैंक से रक्त लेने पर जो भी भुगतान किया जाता है, उस धन को इसी मद में जमा किया जाता है।