लंबे अर्से से जिले में नकली नोटों के धंधे पर अंकुश लगने के बाद मंगलवार को वाराणसी में जिले के तीन आरोपियों की गिरफ्तारी इस कारोबार को फिर से जिले में हवा देने की तैयारी मानी जा रही है। पकड़े गए तीनों आरोपियों में जहां सहायक अध्यापक अजय उपाध्याय पर हत्या के प्रयास सहित तीन मुकदमे दर्ज हैं तो चंद्रप्रकाश शुक्ला बिहार के एक बड़े गिरोह से जुड़ा बताया जाता है। इसी के माध्यम से बिहार और नेपाल से नकली नोटों की खपत करने के लिए मधुबन के दो और साथियों को वह इस धंधे में शामिल करना चाहता था। इस धंधे को मधुबन के देवारांचल में खाद-पानी देने की तैयारी हो रही थी, कि आरोपी इसके पहले ही पकड़े गए। चंद्रप्रकाश शुक्ला पर जिले के मधुबन थाने में एक तथा गोरखपुर, गोंडा व अन्य प्रांतों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मधुबन क्षेत्र के देवरांचल इलाके में नकली शराब से लेकर अनेक प्रकार के अवैध धंधे संचालित है। इसी क्षेत्र के तीन आरोपियों के पास से नकली नोटों का जखीरा बरामद होने के बाद एक बार फिर से यह क्षेत्र चर्चा में है। पकड़े गए सहायक अध्यापक अजय उपाध्याय निवासी नेवादा गोपालपुर पेशे से क्षेत्र में शिक्षक के रूप में ही जाना जाता था। उस पर एक हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज होना बताया जा रहा है, यह मामला पूर्व में गांव में हुई मारपीट के दौरान दर्ज हुआ है। हाल में ही शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने अजय उपाध्याय प्रारंभ से ही बड़ा आदमी बनना चाहता था। सहायक अध्यापक बनने के बाद वह जल्द ही अकूत दौलत कमाना चाहता था। इसके चलते वह चंद्रप्रकाश शुक्ला के संपर्क में आया। पुलिस की मानें तो मधुबन थाना क्षेत्र के कुंवरपुरवा गांव निवासी चंद्रप्रकाश बिहार के एक बड़े गिरोह से जुड़ा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार वाराणसी में तीनों आरोपियों के पकड़े जाने के बाद मधुबन पुलिस इनका आपराधिक इतिहास खंगालने में लगी है। बता दें कि तीन साल पूर्व नगर के दक्षिणटोला, शहर कोतवाली क्षेत्र में भी नकली नोट के साथ कुछ आरोपी पकड़े गए थे। इसके बाद नकली नोट का मामला जिले में शांत चल रहा था। इस संबंध में क्षेत्राधिकारी आनंद सिंह का कहना है कि वाराणसी में पकड़े गए आरोपियों के आपराधिक रिकार्ड की छानबीन की जा रही है।