कस्बा स्थित अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी धाम पर चल रहे ‘दिव्य अमृत मंथन शतांक आदिशक्ति महायज्ञ’ के पांचवें दिन रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सरयू तट पर दो लाख 21 हजार दीपों से महाआरती की गई। इस बीच 10 किमी तक सरयू नदी में जलते दीप टिमटिमाते रहे। इस मौके पर सद्गुरु महाराज ने हाथ में दीपक लिए सरयू में डुबकी लगाई। इसमें नेपाल के भी कई आचार्य और भक्त शामिल हुए।
सद्गुरु महाराज के सानिध्य में सायं छह बजे करीब दो किमी तक लंबी कतार में लगे लाखों लोगों ने हाथों में मिट्टी का दीपक में घी बाती डालकर विधि विधान से मां सरयू की महाआरती की। देश विदेश से आए आचार्यों ने वेद मंत्रों के बीच महाआरती संपन्न कराई। सबसे पहले सदगुरु महाराज ने पांच थालियों में दीप जलाकर मां सरयू को समर्पित करते हुए कहा कि हे मां तुम सबके मन की ज्योति जलाए रखना। सबको सुखी रखना, हे मां सबका मंगल करना। जैसे ही सरयू नदी के बीचधारा मेें सदगुरु महाराज ने हाथ में दीपक लिए डुबकी लगाई तो भक्तों ने जयकारे के बीच अपने-अपने दीपक को नदी में प्रवाहित किया।
भव्य आरती का नजारा देखने के लिए दूर दराज से लोग आए हुए थे। सैकड़ों आचार्यों ने मां सरयू की आरती गाई। महायज्ञ मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जै माता दी के जयकारे से वातावरण भक्तिमय हो गया। उधर महायज्ञ के मेले में करीब एक किमी तक बने 21 हजार 108 कुंडों पर आहुति देने वालों की भारी भीड़ रही। परिक्रमा करने की होड़ मची रही।