जिला पंचायत के सदन में कुल 34 सदस्यों के लिए देर रात तक मतगणना जारी थी। हाला कि कुछ उम्मीदवारों के जीतने की चर्चा भी थी लेकिन अधिकृत रूप से उनके जीत की घोषणा न होने से इसे लेकर ऊहापोह भी रहा। जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारों के समर्थक मतगणना स्थल के बाहर मजमा लगाए हुए थे। मंजर बड़ा रोचक था।
बढ़त हासिल करने वाले उम्मीदवारों के पक्ष में जब जोरदार नारे लग रहे थे। देर रात तक विजयी उम्मीदवारों के अधिकृत घोषणा की उम्मीद है। इस बीच जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवारों की सांस ऊपर नीचे होती रही।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत तथा क्षेत्र पंचायत के चुनाव एक साथ हुए थे।
चार चरणों में हुए चइस चुनाव की मतगणना रविवार को हुई। नौ ब्लाक के क्षेत्र पंचायत सदस्यों का ही परिणाम आने में रात हो गई। हाला कि दोनों पदों की गणना साथ साथ हो रही थी। लेकिन जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए कई चक्र की गणना होने के नाते इस पद की गिनती पूरा होने में बिलंब हुआ।
जिला पंचायत के सदस्य पद का चुनाव इस बार बड़ा रोचक रहा। सपा ने जहां किसी को अधिकृत उम्मीदवार नहीं घोषित किया था वहीं भाजपा, कांग्रेस तथा बसपा ने अपने अध्रिकृत उम्मीदवार मैदान में उतार रखा था। अधिकृत उम्मीदवार न खड़ा करने का खामियाजा सपा को भुगतना पड़ा।
मतगणना का रुझान देखने से पता चला कि चुनाव मैदान में उतरे सपा के कई नामचीन नेता हार की ओर अग्रसर थे। कांग्रेस तथा भाजपा का प्रदर्शन भी बड़ा निराशा जनक रहा। बसपा के कुछ चर्चति नेता जरूर बढ़त बनाए हुए थे।
कुल 34 सदस्यों के लिए 594 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान की घोषणा के अनुसार प्रथम , द्घितिय तथा तृतिय चक्र के मतदान वाले प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार का मौका बहुत ही कम मिल पाया था। इस मतदान तिथ वाले वे उम्मीदवार जो मतो की गिनती में काफी पिछड़े हुए हैं, वे प्रचार न कर पाने का रोना रो रहे हैं।