मुंशीपुरा आउटर के पास सोमवार की शाम मालगाड़ी के दो इंजनों के डिरेल होने को मामले में प्रथम दृष्टया आउटर स्टेशन मास्टर, लोको पायलट समेत पांच लोग दोषी ठहराए गए हैं। डीआरएम के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। गठित पांच सदस्यीय टीम ने अपनी जांच में प्रथम दृष्टया जांच रिपोर्ट बनाकर डीआरएम को भेज दिया। जिसमें आउटर स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, सहायक पायलट, दो कांटा वाला कर्मचारी को दोषी करार दिया गया है।
हादसे की जांच को गठित पांच सदस्यीय टीम जिसमें कैरेज पर्यवेक्षक, लोको पर्यवेक्षक, रेलपथ पर्यवेक्षक, सिंगल पर्यवेक्षक और यातायात पर्यवेक्षक द्वारा प्रथम दृष्टया जांच रिपोर्ट तैयार कर बुधवार को डीआरएम को भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट में इंजन के डिरेल होने के पीछे शंट सिग्नल संख्या-63 को ऑफ स्थिति में देखकर और शंट सिंग्नल संख्या- 103 के ऑन स्थिति को नजरअंदाज करने के कारण घटना का जिक्र किया गया।
जिसमें प्रथम दृष्टया स्टेशन आउटडोर स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और दोनों कांटा वालों को जिम्मेदार ठहराया गया है। पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि हादसे को लेकर पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। वहीं उन्होंने जांच रिपोर्ट की फिलहाल कोई जानकारी होने की बात से इंकार कर दिया।
सोमवार की शाम मालगाड़ी में इंजन जोड़ने के दौरान मुंशीपुरा के पास डबल इंजन नंबर डब्लूएजी 13584 शंटिंग के दौरान डिरेल हो गया था। इस दौरान अगला इंजन का 6 पहिया और पिछला इंजन का पांच पहिया पटरी से उतर गया था। हालांकि इंजन की धीमी रफ्तार होने के चलते इंजन पलटने से बच गया। जहां एमएफडी हाइड्रोलिक जैक सिस्टम के जरिए इंजन को उठाकर फिर से पटरी पर लाया गया। जहां 6 घंटे की मशक्कत के बाद रात 1 बजे रेलवे ट्रैक बहाल हो पाया।