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Mau News: पहले शुद्ध होगा नालों का गंदा पानी, फिर तमसा नदी में गिरेगा

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मऊ। नगर क्षेत्र के नालाें से प्रतिदिन निकलने वाले गंदे पानी से तमसा नदी को प्रदूषित होने से बचाने की पहल की जा रही है। नाले के पानी को बायोरेमेडिएशन (सूक्ष्म जीवों) और फाइटोरेमिडिएशन (पौधों) तकनीक से शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे तमसा नदी के पानी को प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा।
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नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि नगर क्षेत्र स्थित नालों की गंदगी को कम करने तथा गंदे पानी की विषाक्तता को कम करने के लिए नगरपालिका क्षेत्र में फाइटोरेमिडिएशन तकनीक का प्रयोग शुरू हो चुका है। गत दो वर्षाें से पालिका की तरफ से बायोरेमिडिएशन तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले से चल रहे बायोरेमिडिएशन के साथ अब फाइटोरेमिडिएशन तकनीक का भी प्रयोग कर हम नगर के नालों के पानी को साफ करने का प्रयास कर रहे हैं। नगरवासियों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालने वाले गंदे पानी की तीव्रता को कम करने के लिए तकनीक द्वारा ग्राउंड लेवेल पर ही पानी की गंदगी को दूर करने से मानव स्वास्थ्य को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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बताया कि बायोरेमिडिएशन में बैक्टिरिया कल्चर से नालों के पानी को शुद्ध किया जाता है। अब नगर पालिका ने फाइटोरेमिडिएशन तकनीक का प्रयोग भी आरंभ कर दिया है। इस तकनीकी से नालों में एक विशेष प्रकार के पौधे रोपित किए जाते हैं। वे पौधे अनवरत पानी में तैरते रहते हैं। इस प्रकार लगे पौधे नालों में पानी की सतह कम और अधिक होने पर पानी की ऊपरी सतह पर ही तैरते रहते हैं। इस दौरान निकासी वाले पानी की गंदगी को अवशोषित करते रहते हैं। इससे पानी में विलीन विषाक्त पदार्थों को अपने प्रयोग में लेकर प्राकृतिक तौर पर पानी की गंदगी को साफ कर देते हैं।
सफाई एवं खाद्य निरीक्षक सत्य प्रकाश ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से हम नगर क्षेत्र के सभी नालों को प्यूरीफाई करने के लक्ष्य पर कार्य कर रहे हैं। पालिका ने इस तकनीकी का प्रयोग करते हुए ढेकुलियाघाट स्थित नाले में प्लांट रोपित किया है। यह पौधे अवशोषण के माध्यम से नाले के पानी से मिश्रित विषाक्त पदार्थों का सेवन कर पानी को हानिरहित बना देते हैं। इस प्रकार नालों में बहने वाला पानी आसपास रहने वालों के लिए हानिकारक नहीं रह जाता।
इस प्रकार, जीवन पर इनका बुरा प्रभाव भी नहीं पड़ता। इस तकनीकी का प्रयोग अभी नगर के कुछ नालों में ही किया जा रहा है जबकि आगे इसे बृहद पैमाने पर स्थापित करने की योजना है। इस प्रकार बहुत जल्द नगर के नालों से होने वाली हानि पर काबू पाया जा सकेगा।
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