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Mau News: मऊ डिपो की 70 फीसदी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सेहत खराब

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नगर रोडवेज परिसर में खड़ी बस में खाली मिला फस्ट एड बाक्स। संवाद
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मऊ डिपो प्रशासन का ध्यान बसों से होने वाली कमाई पर है। बसों यात्री सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। डिपो के बेड़े में सभी बसें बीएस-4 और बीएस-6 की हैं। डिपो की 70 फीसदी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सेहत खराब है। किसी बस में फर्स्ट एड बॉक्स खाली है तो किसी में सिर्फ काॅटन-पट्टी है। चालक प्राथमिक उपचार वाली दवाइयां भी नहीं रखते हैं।
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रविवार को मऊ डिपो बस स्टेशन परिसर में खड़ी मऊ डिपो की बसों की अखबार की टीम ने पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई । कुछ बसों में केवल कॉटन और पट्टी मिली, तो किसी में एक्सपायरी दवाइयां रखी मिलीं। बीएस-4 की बसों में फर्स्ट एड बॉक्स ही नहीं दिखे। गर्मी में बस से यात्रा करने वालों की तबीयत बिगड़ती है या चोट लगती है तो उसे प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल है। बसों में उल्टी रोकने वाली दवाइयां भी नहीं मिलीं। मऊ डिपो के बेड़े में 73 रोडवेज बसें हैं, इनमें 11 अनुबंधित हैं। रोजाना 20 से अधिक बसें पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे होते हुए लखनऊ जाती हैं। 15 से 18 बसें गोरखपुर, एक वाराणसी, गाजीपुर, दो प्रयागराज, 10 बसें आजमगढ़ से शाहगंज और बलिया, 7 से 8 बसें अयोध्या रूट पर चलती हैंं। इनके अलावा कुछ ग्रामीण रूटों पर भी बसें संचालित होती हैं। बसों से रोज लगभग 6000 लोग यात्रा करते हैं।
शादी और त्योहार के सीजन में एक से दो हजार यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। नियमानुसार सभी बसों में प्राथमिक उपचार वाली जरूरी दवाइयां रखना अनिवार्य है। एक साल पहले प्रयागराज महाकुंभ से पहले बीएस-6 की 15 से अधिक बसें डिपो को मिली थीं। इन बसों में मुख्यालय से ही दवाइयां भरकर आई थीं दोबारा परिचालकों ने बसों में दवाइयां नहीं रखीं।
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बस स्टेशन परिसर में 7903, 7899, 8021, 3203 नंबर वाली बसों में फर्स्ट एड बॉक्स खाली मिले। इसके अलावा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होते हुए लखनऊ जाने वाली दो और गोरखपुर जाने वाली तीन बसों में जरुरी दवाइयां नहीं मिलीं। बस नंबर 0282 में दवाई का बैग तो था लेकिन उसमें भी केवल कॉटन और पट्टी थी।
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