धोखाधड़ी के मामले में रविंद्र प्रताप सिंह की तहरीर पर पुलिस अधीक्षक के आदेश पर मऊ कोतवाली पुलिस ने सोमवार को ब्रोकर आनंद बासोतिया, ट्रांसपोर्टर सहित तीन लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है।
आरोप है कि अलग-अलग तिथियों में वाराणसी भेजे गए 98.35 लाख रुपये के धागे का बिल और इनवॉइस बदलकर आनंद बासोतिया ने अपने खाते में भुगतान करा लिया।
प्राथमिकी के अनुसार, मऊ कोतवाली के भीटी हनुमान नगर निवासी रविंद्र प्रताप सिंह मलिक ताहिरपुरा स्थित फर्म करिश्मा यार्न प्राइवेट लिमिटेड में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।
कोतवाली के बल्लीपुरा निवासी ब्रोकर आनंद बासोतिया के कहने पर तीन जुलाई से नौ जुलाई तक फर्म रसूलपुरा बुनकर मार्केट, बड़ी बाजार, वाराणसी स्थित एसएन रेयान और महापालिका कटरा, नीची बाग स्थित श्री कृष्ण एजेंसीस को 98 लाख 35 हजार 543 रुपये का धागा भेजा गया।
तीन जुलाई को 27 लाख 12 हजार 528 रुपये और चार जुलाई को 25 लाख तीन हजार 872 रुपये का धागा एसएन रेयान को भेजा गया।
श्री कृष्ण एजेंसीस को सात जुलाई को 25 लाख 31 हजार 88 रुपये और नौ जुलाई को 20 लाख 88 हजार 55 रुपये का धागा बरपुर स्थित ट्रांसपोर्ट के माध्यम से भेजा गया।
बाद में जानकारी हुई कि ब्रोकर आनंद बासोतिया और ट्रांसपोर्टर ने आपस में मिलकर पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत धागा बीच रास्ते से ही हड़प लिया। माल के साथ लगी बिल-इनवॉइस हटाकर उसकी जगह ब्रोकर ने अपनी कथित फर्जी फर्म की बिल-इनवॉइस लगा दी।
इसके बाद उसी माल की आपूर्ति वाराणसी स्थित दोनों खरीदार फर्मों तथा कुछ अन्य दुकानदारों को ब्रोकर की फर्म के नाम से कर दी गई। जब करिश्मा यार्न फर्म को माल का भुगतान नहीं हुआ तो फर्म के प्रतिनिधि वाराणसी स्थित दोनों फर्मों के पास जाकर बातचीत की।
पता चला कि उन्हें करिश्मा यार्न के नाम से कोई सप्लाई या बिल नहीं मिला था। माल मिला, लेकिन वह ब्रोकर की फर्म के बिल के साथ था। इस कारण भुगतान भी उसी फर्म के खाते में कर दिया गया।
कोतवाल प्रमेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।