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हजारों एकड़ फसल नष्ट होने से किसान परेशान

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मऊ के दुबारी क्षेत्र के मनमनपुरा गाँव के पास बाढ़ के पानी से घिरी दुकान। अमर उजाला - फोटो : MAU
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दोहरीघाट। घाघरा नदीके जलस्तर में लगातार घटाव होने से नगर सहित तटवर्ती इलाको में लोगो ने राहत को सांस ली है। नगर की ऐतिहासिक धरोहर को लेकर लोगों की चिंताएं कम होने के साथ ही कटान तेज होने को लेकर आशांकित भी है। तटवर्ती इलाको में नदी का जलस्तर घटने के बाद भी पानी निकासी की व्यवस्था न हो पाने से अभी ग्रामवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी घटने के बाद भी खतरा अभी टला नही है। नगर को ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा ज्यो का त्यों बना हुआ है।तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी रुका होने से संक्रामक रोगों के फैलने से महामारी की आशंका से लोग भयभीत है।सोमवार को घाघरा का जलस्तर 70.70 मीटर रहा। जबकि मंगलवार को 70.60 मीटर रहा। इस प्रकार बीते 24 घंटे में नदी के जलस्टर में दस सेमी की कमी हुई है।नदी अभी भी खतरा बिंदु 69.90 मिटर से 70 सेमी ऊपर बह रही है।
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दुबारी। घाघरा नदी के जलस्त में जलजमाव रहने से लोगों को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारा का संकट उत्पन्न हो गया है। शासन प्रशासन की तरफ से समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है। घाघरा नदी के जलस्तर में घटाव के बाद भी देवारा क्षेत्र के लोगों की समस्याएं बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को नदी का जलस्तर 66.36मीटर रहा। सोमवार को 66.51 मीटर रहा। नदी के खतरा बिंदु से पांच सेमी ऊपर बहने से धर्मपुर नई बस्ती, जरलहवा, नकीहवा, बिंटोलिया, खैरा बिशुन का पुरा, बिंदर का पुरा, हाता, चौहानपुर, लीलहवा, बईरकंटा, भगत का पुरा, धुस, मनमन का पुरा, पब्बर का पुरा, दुबारी, नयी बस्ती, चक्की मुसाडोही, बरोहा, कुंवरपुरवा, गजियापुर छावनी, मोलनापुर, बलुआ, परसिया, जयराम गिरी, टाडी़, सुन्नर का पुरा आदि गांव महीनों से टापू में तब्दील हैं।
गांवों में काफी समय से बाढ़ का पानी जमा होने से लोगों को बंधों पर शरण लेकर खानाबदोश की जिंदगी जीना पड़ रहा है। गांवों में जलजमाव से दुर्गध उठ रही है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोग मच्छरजनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इसके बावजूद फागिंग नहीं कराया जा सका है।50किमी से अधिक एरिया में जलमग्न हजारों एकड़ फसलें नष्ट होने से पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। किसान आर्थिक पैकेज देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से सुधि नहीं ली जा सकी है।
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सूरजपुर। दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र में आई बाढ से फसलों की हुई व्यापक पैमाने पर हुए नुकसान से क्षेत्र के किसान कराह रहे हैं।इस वर्ष किसानों पर आपदा की दोहरी मार पड़ी है। अप्रैल-मई माह में हुई बारिश में गेहूं की फसल बर्बाद हुई थी।अब बाढ़ की विभीषिका से किसानों को खून के आंसू रोना पड़ रहा है। घाघरा नदी में आई बाढ़ से क्षेत्र के सूरजपुर,रसूलपुर, महुआबारी, बेलौली, रसूलपुर, आश्रम मोर्चा, कोटिया, मिश्रौली, सोनबरसा, परसिया देवारा, चंद्राबारी सहित विभिन्न गांवों के सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बाढ़ के पानी से बर्बाद हो चुकी है।अपनी फसल को बर्बाद होते देख किसानों की नींद उड़ गई है। चारे की चिंता अभी से ही सताने लगी है।
बाढ़ का पानी फसलों को बर्बाद करते हुए गांवों की गलियों की ओर बढ़ चुका है।जिससे आम जनता की दिनचर्या बदल सी गई है।बाढ़ के चलते सभी गांवों के संपर्क मार्ग पर जलजमाव से आवागमन ठप है। इसके चलते गांव के लोग एकांकी जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं। पूर्णतया खेती पर आधारित क्षेत्र के लोगों ने बताया कि किसी तरह ब्याज पर रुपया उधार लेकर फसल लगाया था। अचानक बाढ़ आने से फसलें डूबकर बर्बाद हो गई है। खेत-खलिहान में लहलहाती फसल की जगह पानी लबालब भरा है, लेकिन सबसे अधिक पीड़ा बटाईदार किसानों को हो रही है। इस संबंध में क्षेत्र के भाजपा अनुसूचित मंत्री मनोज कुमार सतीक्षण मिश्रा, समाजसेवी पवन सोनकर, मुखलाल, रविंद्र सिंह का कहना है कि किसानों बताया कि बाढ़ के पानी ने पूरी फसल बर्बाद कर दिया है। फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिया जाए।
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