अखिल भारतीय किसान सभा के तत्वाधान में मंगलवार को किसानों ने मोदी सरकार के वादा खिलाफी के विरुद्ध कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने किसानों के संकट पर सरकारों की चुप्पी पर भड़ास निकाली। कहा कि यह सरकार किसान विरोधी हो चुकी है। किसानों और आम लोगों की किसी को चिंता नहीं रह गई है। धरने के उपरांत कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए किसान सभा के महामंत्री एवं पूर्व विधायक दीनानाथ सिंह ने भाजपा ने जनता से भी वादे किए थे उस पर वह खरा नहीं उतरी। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार का आधे से अधिक किसानों को सूखा राहत का पैसा नहीं मिला। नाममात्र के किसानों को ही खरीफ की फसल का मुआवजा मिल पाया है। कहा कि इस बार भी किसानों की फसल ओलावृष्टि से बर्बाद हुई है।
पिछले दो सालों से सूखा पड़ने के चलते किसानों के सामने भुखमरी का संकट है। कहा कि सरकार ने गेहूं का जो समर्थन मूल्य घोषित किया है वह किसानों की उपज के हिसाब से कत्तई उचित नहीं है। प्रदेश सरकार का आलम यह है कि वह न तो किसानों को बोनस दे रही है और न ही समर्थन मूल्य पर खरीद ही कर रही है। इससे किसानों के सामने आगामी फसल के लिए चिंता सताने लगी है।
किसान सभा के प्रांतीय संयुक्त मंत्री साधू शरण ने कहा कि पुराने ताल पोखरों के समाप्त हो जाने तथा ज्यादा पानी दोहन होते रहने के कारण पेयजल का संकट पैदा हो गया है। पेयजल के साथ-साथ अनाज व पशुओं के चारे का भी संकट है। राज्य सरकार द्वारा शुरुआत कार्य नाकाफी है। किसान अपने पशुओं को घरों में नहीं पाल पा रहे हैं।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष रामअवतार सिंह ने कहा कि राशन कार्ड व राशन वितरण का सवाल भयावह रूप लेता जा रहा है। जिलापूर्ति विभाग कोटेदार की मिलीभगत से आम गरीब जनता का शोषण कर रहा है। गरीब जनता दो वक्त की रोटी के लिए परेशान है। पात्र लोगों का कार्ड नहीं मिल पा रहा है।
किसानों ने इस दौरान नहरों की साफ सफाई, जलाशयों से अवैध कब्जा हटाने निशुल्क बोरिंग योजना के तहत आवंटित करने की मांग की। कार्यक्रम के उपरांत कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस अवसर पर मुख्य रूप से वीरेंद्र कुमार, परशुराम, ब्रह्मदेव, शम्शुलहक चौधरी, शिवाकांत मिश्रा, साधू आदि उपस्थित रहे।