मऊ के विभिन्न इलाकों में अगलगी की घटनाओं में गेहूं की लगभग 500 एकड़ से अधिक फसल नष्ट होने के बाद किसानों को खून के आंसू रोना पड़ रहा है। विभाग की ओर से क्षति का आंकलन करने का दावा तो किया जा रहा है। लेकिन मुआवजा किसानों को कब तक मिलेगा, अधिकारी बताने की स्थिति में नहीं हैं।
कंबाइन मशीन से काटे गए डंठल जलाने से भी गेेहूं की फसल में अगलगी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। मगर कृषि विभाग और राजस्व विभाग उदासीन है। पीड़ित किसान मुआवजा पाने के लिए मंडी समिति से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं।
हर वर्ष शार्ट सर्किट से हजारों एकड़ गेहूं की फसल नष्ट होती है, लेकिन विभाग की ओर से जर्जर तारों को बदला नहीं जाता। कागज पर प्रतिवर्ष फसल क्षति का आंकलन कराया जाता है, लेकिन केवल पहुंच वाले कुछ किसानों को मुआवजा देकर इतिश्री कर दी जाती है।
रविवार को दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के कई गांवों में शार्ट सर्किट से सैकड़ों बीघा फसल जलकर स्वाहा हो गई। शासन प्रशासन की ओर से पीड़ित किसानों की फसल क्षति का आंकलन कराने का फरमान तो जारी कर दिया गया है, मुआवजा कब मिलेगा पता नहीं।
अधिकारियों की मानें तो शार्ट सर्किट से फसल जलने पर निदेशक विद्युत सुरक्षा के नेतृत्व में टीम क्षति का आंकलन करती है। रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय किया जाता है। जबकि दूसरी तरह से अगलगी की घटना में जली फसल का आंकलन राजस्व विभाग के कर्मचारी करते हैं।
मंडी समितियों के माध्यम से किसानों से फार्म भरवाया जाता है। इसके बाद राजस्वकर्मी मंडी समितियों से फार्म लेकर क्षति का आंकलन करते हैं। कंबाइन मशीनों से गेहूं की फसल कटाई का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। खेतों में पड़े अवशेष को किसान जला रहे हैं। इसके चलते घोसी सहित कई इलाकों में गत दिनों कई बीघा फसल जलकर नष्ट हो गई थी।
लेकिन न तो राजस्व विभाग और न ही पुलिस विभाग कंबाइन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई कर सका है।किसानों की मानें तो न तो मंडी समितियों के अधिकारी और न ही राजस्वकर्मी रुचि ले रहे हैं। अपर जिलाधिकारी शिवकुमार शर्मा का कहना है कि फसल क्षति आंकलन कराने के लिए सभी तहसीलदारों को निर्देश दिया गया है। मंडी समिति की रिपोर्ट पर किसानों को मुआवजा मिलता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
विद्युत वितरण खंड तृतीय के अधिशासी अभियंता रामपाल का कहना है कि शार्ट सर्किट से यदि किसानों की फसल नष्ट होती है तो बिजली विभाग के कार्यालय में पीड़ित किसान को शिकायत दर्ज कराना पड़ेगा। प्रार्थना पत्र मिलने के बाद निदेशक विद्युत सुरक्षा को अवगत कराया जाएगा। जांच के बाद बिजली विभाग का दोष सिद्ध होने पर किसान को मुआवजा दिया जाएगा।