जिले में आग की घटनाओं से किसानों की फसलों का खासा नुकसान हुआ है। जबकि शासन-प्रशासन स्तर पर अभी तक क्षति का आकलन का कार्य भी नहीं शुरू हुआ। ऐसे में खून के आंसू रो रहे किसानों की आस अब मुआवजे पर लगी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को मेल भेज कर न्याय की गुहार लगाई है। अगलगी की घटनाओं में अब तक 435 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो चुकी है। जिले के 37 विद्युत उपकेंद्रों से जिले के विभिन्न गांवों में बिजली की सप्लाई की जाती है।
हर साल शार्ट सर्किट व अगलगी की घटनाओं से सैकड़ों एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। हालत यह है कि मार्च से अब तक लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की 435 बीघा से अधिक गेहूं की फसल जलकर स्वाहा हो चुकी है।
कृषि उत्पादन मंडी समिति के अधिकारियों की मानें तो अभी तक 10 किसानों द्वारा फार्म भरा गया है। एक एकड़ पर चार हजार रुपया मुआवजा देने का प्रावधान है। किसानों की मानें तो प्रति एकड़ गेहूं की खेती में 15 हजार लागत आती है, लेकिन मंडी समिति से मात्र प्रति एकड़ चार हजार रुपया ही मुआवजा का प्रावधान है।
वह भी मुआवजा रिपोर्ट बनाने में राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है। लोकदल के प्रदेश सचिव व किसान नेता देवप्रकाश राय, लोकदल जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, संजय सिंह का कहना है कि किसानों की फसलों को बचाने की ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की जा सकी है।
किसानों द्वारा मंडी समिति में मुआवजा के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो जाता है, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए से किसानों को भी मुआवजा नहीं मिल पाता है। मुआवजा राशि भी कम तय की गई है।
कम से कम 20 हजार रुपया मुआवजा दिया जाए। लेकिन सरकार इस ओर से आंखें मूंदे हैं और इधर किसान अपनी फसलों की बर्बादी पर रोने को मजबूर है। इसके अलावा उसके पास कोई चारा ही नहीं बचा है।