दुबारी (मऊ)। कटान की समस्या तो देवारांचल के लिए हर वर्ष की बात है। हर साल बाढ़ की तबाही कई गांवों के लिए काला इतिहास बनाकर जाती है। इस वर्ष भी यह तबाही इन दिनों अपने चरम सीमा पर है। घाघरा नदी में घटाव के बाद कटान की स्थिति बढ़ा रही है। कटान से सबसे ज्यादा प्रभावित बिंदटोलिया गांव के लोगों की समस्या जानने का प्रयास मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने किया। टीम ने इस दौरान कटान की विभिषका को देखने के बाद गांव के कुछ लोगों से बातचीत की।
इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि कटान की जद में आने से एकमात्र जूनियर स्कूल भी बह चुका है। कई ग्रामीणों के अशियाने इसके जद में आ चुके है। बावजूद जिम्मेदार प्रशासन को यह समस्या दिख नहीं रही है। हालात यह है कि कई ग्रामीण जो कि खेती किसानी पर निर्भर थे आज उनके पास एक गज जमीन भी नहीं बची है। अमर उजाला की टीम को ऐसे ही चार लोगों से बातचीत की, जिनका अशियाना, खेत सब इस कटान की भेंट चढ़ चुका है।
अब सात किमी दूर पढ़ने जाएंगे गांव के बच्चे
दुबारी। बिंदटोलिया गांव निवासी श्रीकांत बताते है कि गांव में हर वर्ष घाघरा नदी तबाही मचाती है। नदी की धारा को मोड़ने के लिए पिछले वर्ष करीब 12.34 करोड़ का बजट आया लेकिन डाईवर्जन चैनलाइजेशन निर्माण काफी लेट से शुरू हुआ। जिसके कारण घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ गया और निर्माण कार्य बंद हो गया। वर्तमान में जिम्मेदारों की यह लापरवाही गांव पर भारी पड़ रही है। कहा कि वर्तमान में नदी की धारा सीधे बिंटोलिया गांव को निशाना बना रही है। बोले कि उनके द्वारा गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो दशक पूर्व हाईस्कूल शुरू किया गया था। आठ कमरे में संचालित स्कूल में 400 के करीब छात्र थे, लेकिन आज यह स्कूल भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में अब बच्चों को आठवीं के बाद पढ़ने के सात किमी दूर धर्मपुर टाडी में बने स्कूल में जाना पड़ेगा।
मकान के साथ खेती भी चढ़ गई घाघरा की भेंट
दुबारी। बिंदटोलिया निवासी रामजीत बिंद बताते है कि पांच वर्ष में उनके दो घर घाघरा की कटान के भेंट चढ़ चुका है। इतना हीं नहीं इस बीच उनकी 28 बीघा की उपजाऊ जमीन भी घाघरा में समा चुकी है।घर-खेती के कटान में समाने के बाद वह प्राइमरी स्कूल में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं।
कैसे होगा परिवार का भरण पोषण
दुबारी। बिंदटोलिया निवासी धर्मेंद्र बताते है कि कटान की विभिषका को याद कर और उनका परिवार सिहर उठता है। बताया कि उनका मकान तथा बीस बिगहा जमीन घाघरा की कटान में आ चुका है। बताया कि उसका मकान कटान में आने के बाद बीते दस दिनों से वह और उसका परिवार प्राइमरी स्कूल में रह रहा है।
गांव के लोग बने मददगार
दुबारी। बिंदटोलिया निवासी भूपेंद्र ने बताया कि कटान में उसका मकान भी आ गया है।बताया कि कटान में मकान को समाता देखकर लोग सामान निकालने के बाद खुद मकान को तोड़ते है। जिससे कुछ ईट और दूसरे समान तो संरक्षित हो सके। बताया कि बेसहारा होने के बाद गांव के लोगों ने उसे और उसके परिवार को सहारा दिया है।
प्रशासनिक मदद ऊंट के मुंह में जीरा
दुबारी। प्रशासन द्वारा कटान के चलते बेसहारे लोगों के लिए मदद की कवायद तो की गई है, लेकिन यह ऊट के मुंह में जीरा की कवाहत चरितार्थ कर रही है। कटान से गांव के 50 से ज्यादा ग्रामीण बेसहारे हो चुके है, लेकिन इसमें 30 के लिए घर बनाने के लिए जमीन आवंटित हुई है। शेष अभी जमीन के लिए तहसील का चक्कर काट रहे हैं। इस बाबत एसडीएम मधुबन लालबाबू दुबे का कहना है कि कटना पीड़ितों की मदद की कवायद जारी है। कटान से नुकसान का रिपोर्ट शासन को भेजा जा रहा है। बीते वर्ष नुकसान की भेजी गई रिपोर्ट पर क्षतिपूर्ति इस वर्ष मिल चुका है। वर्तमान में कटान पीड़ितों को स्कूल में ठहरने की व्यवस्था की गई है।