-सदर तहसील के देवकली विशुनपुर और सरायमक्खन में राजस्वकर्मियों पर पांच बीघे जमीन कब्जा कराने का आरोप सिद्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। रुपये लेकर भूमाफियाओं को जमीन कब्जा कराने का आरोप सिद्ध होने पर डीएम प्रवीण मिश्र ने राजस्व निरीक्षक वीरेंद्र चौधरी की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। शिकायत के डेढ़ साल बाद शिकायतकर्ता को न्याय मिला है।
सदर तहसील के देवकली विशुनपुर और सरायमक्खन मौजा में पांच बीघे जमीन की रजिस्टर्ड वरासत होने के बाद भी खतौनी पर नातियों का नाम चढ़ाने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता पीयूष राय ने आरोप लगाया कि इस कूटरचना में दो राजस्व निरीक्षक और एक लेखपाल के हस्ताक्षर हैं, लेकिन केवल एक के विरुद्ध कार्रवाई हुई है। देवकली विशुनपुर गांव निवासी पीयूष राय ने 08 जुलाई 2024 को डीएम को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि उनके पिता के चाचा जित्तन राय ने एक जून 1987 में अपनी पूरी जमीन पिता के नाम रजिस्टर्ड वसीयत कर दी थी। 04 अगस्त 2003 को जित्तन का निधन हो गया, फिर 27 दिसंबर 2004 को पूरी जमीन पीयूष के पिता के नाम दर्ज हो गई। लेकिन जित्तन का नाम वर्ष 2024 तक खतौनी पर चलता रहा। कसारा गांव निवासी जित्तन राय के नातियों ने राजस्व निरीक्षक वीरेंद्र कुमार चौधरी, सहित दो अन्य लोगों को प्रभाव में लेकर खतौनी पर अपना नाम दर्ज करा लिया। रजिस्ट़़र्ड वसीयत का आदेश निरस्त करा दिया। इस मामले में डीएम के जवाब मांगने पर तत्कालीन राजस्व निरीक्षक कोपागंज (वर्तमान में सरया) वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि खतौनी पर नाम वर्ष 2004 में ही दर्ज होने से छूट गया है क्योंकि तत्कालीन कर्मचारियों की गलती है मालिकान में दर्ज खाता संख्या गलत है। इसके चलते ऐसा हुआ है।
कोट
इस मामले में एडीएम से जांच कराई गई थी। कूटरचना में भागीदारी संदिग्ध पाए जाने पर वीरेंद्र चौधरी की वेतन वृद्धि रोकी गई है। दो अन्य राजस्वकर्मियों भूमिका की जांच कराई जा रही है।
प्रवीण मिश्र,डीएम