रजनीकांत पांडेय
मऊ। अच्छा वेतन मिलने के बाद भी सरकारी अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के पर्चे पर बाहरी महंगी दवा लिख रहे हैं, वजह अस्पताल में दवाईयों का टोटा होना नहीं बल्कि इसके बदले मिलना वाला मोटा कमीशन है। यह बात हम ऐसे नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों में मारपीट के मामले खोल रहे है। हाल ही में ही बीते दिनों रतनपुरा सीएचसी में एक मेडिकल स्टोर संचालक की ओर से कमीशन मांगे जाने से परेशान होकर फार्मासिस्ट से मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया था। इससे पहले घोसी सीएचसी में भी स्वास्थ्यकर्मी से मेडिकल स्टोर संचालक ने मारपीट की थी, इसके पीछे भी दवाईंयों के कमीशन का मामला था। यह मामला तो वह है जो उजागर हो गया, ऐसे कई मामले हैं, इसमें बात बिगड़ी तो लेकिन मामला हस्तक्षेप कर दबा दिया गया। उधर इन सब मामलों को जानने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने मौन साध रखा है, जो कि सवालिया निशान उठा रहे हैं।
नियमानुसार किसी भी सरकारी अस्पताल में तैनात चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी को बाहर की दवाईयां नहीं लिखनी हैं। बावजूद जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल के अलावा 10 वों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह नियम केवल कागजी है।
जांच अस्पताल से कराई तो भी डॉक्टर ने बाहर से नहीं कराने पर आपत्ति जताई
दिसंबर 2022 में कोपागंज ब्लॉक के बाबूपुर साहूपुर निवासी प्रदीप को परिजनों ने बुखार और सीने में दर्द होने पर अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान घोसी की महिला मरीज भी भर्ती थी। जहां चिकित्सक ने दोनों मरीज को ईसीजी और अन्य जांच के लिए कहा। परिजनों ने आरोप लगाया था कि सभी जांच अस्पताल से कराई। जब परिजन जांच के बाद रिपोर्ट लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने बाहर से जांच न कराने पर आपत्ति जताई। बाहर से जांच कराने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद मजबूरन दूसरी बार जांच कराई। इतना ही नहीं दवा भी बाहर से लाने का दबाव बनाया। जिस बात को लेकर मरीज और परिजनों ने विरोध किया तो उनके और डॉक्टर की कहासुनी हो गई। तब मरीज ने तत्कालीन सीएमएस डॉ. नाहिदा खातून सिद्दकी से शिकायत की। इस संबंध में सीएमएस ने संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा था।
फार्मासिस्ट को मेडिकल स्टोर के मालिक ने पीटा
वहीं गत दिनों रतनपुरा सीएचसी में इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे एक फार्मासिस्ट से एक बाहरी मेडिकल स्टोर संचालक ने मारपीट कर दी। जहां पीड़ित फार्मासिस्ट ने आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक के विरुद्ध तहरीर दी, वहीं इस मामले में आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक ने फार्मासिस्ट से कमीशन न मिलने पर अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। इस मामले में अभी तक जहां स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने मौन साध रखा हैं, वहीं हलधरपुर पुलिस इस मामले में जांच में जुटी है।
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बाहर की दवा न लिखने पर चिकित्सक से हुई थी मारपीट
मऊ। अगस्त 2021 में घोसी सीएचसी में तैनात डॉ. एसके पंकज ने पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि वह कक्ष में मरीजों को देख रहे थे। इस बीच घोसी कोतवाली के पिढवल निवासी तथा सीएचसी के उत्तरी गेट पर मेडिकल स्टोर चलाने वाले व्यक्ति का पुत्र आया और उनसे बाहर से दवा लिखने को लेकर बातचीत करने लगा। विरोध किया तो युवक अपशब्द कहने लगा। स्वास्थ्यकर्मियों तथा मरीजों के विरोध पर युवक ने पिता को भी बुला लिया। आरोप लगाया कि कुछ देर बाद मेडिकल स्टोर संचालक भी पहुंच गया। अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उसने उनके साथ मारपीट की और ओपीडी रजिस्टर फाड़ दिया था। इस दौरान असलहा दिखाते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। अचानक हुए हमले से सीएचसी में भगदड़ मच गई थी।
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इनसेट
298 प्रकार की होती हैं दवाईयां
नियमानुसार जिला अस्पताल में 298 प्रकार की दवाईयां मिलती हैं, इसमें खांसी, बुखार, सिर दर्द सहित अन्य बीमारियों की दवाईंयां शामिल हैं। इतना ही नहीं इन दवाईयां की जानकारी ओपीडी की दीवार पर वहां मिलने वाली दवाओं की सूची तो लिखी होना चाहिए। अगर दवाईयां नहीं हैं, तो उसे रोजाना अपडेट किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है, दवाईयां होने के बाद भी कमीशन के चक्कर में बाहर की दवाईयां सादे कागज पर लिखी जाती है।
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कोट
रतनपुरा सीएचसी में फार्मासिस्ट से मारपीट का मामला संज्ञान में है, मामला पुलिस के पास है। वहीं रही बात बाहर से दवाईयां लिखने की तो ऐसी अभी तक शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. नंदकुमार, सीएमओ मऊ