मऊ। नए वर्ष 2021 से पूर्व भटनी-वाराणसी रूट से गुजरने वाली हर ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजन से लैस होकर फर्राटा भरते नजर आ रही है। 2016 से शुरू हुई विद्युतीकरण योजना पूर्ण होने के इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें अपनी गति से दौड़ते नजर आ रही हैं। उधर जहां विद्युतीकरण से रेलवे को हर माह लाखों रुपये का राजस्व की बचत हो रही है, वहीं यात्रियों कम समय में गतव्य स्थान पर पहुंचने से राहत महसूस कर रहे है। विद्युतीकरण कार्य पूरा होने से जिले की विकास गति तेज होने की आस जगी है। वहीं इससे जनपदवासियों में खुशी का माहौल है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने औड़िहार में 230 करोड़ की लागत से 275 किमी लंबे मऊ-शाहगंज छपरा तथा औड़िहार-भटनी रेलमार्ग पर विद्युतीकरण कार्य का शिलान्यास किया था। शिलान्यास के कुछ माह बाद से इन दोनों रूटों पर विद्युतीकरण का काम शुरू हो गया है। दोनों कार्य को मार्च 2020 तक पूरा होना था। लेकिन छपरा-शाहगंज पर अभी विद्युतीकरण कार्य शेष है। लेकिन भटनी-वाराणसी रूट के बीच विद्युतीकरण का कार्य निर्धारित समय से पूर्व हो गया।
जिसके बाद बीते 10 अगस्त 2020 को भटनी-औड़िहार रूट पर पूर्ण हुए विद्युतीकरण कार्य पर संरक्षण मानकों के परखने के उद्देश्य से रेल संरक्षा आयुक्त पूर्वोत्तर परिक्षेत्र मुहम्मद लतीफ खान ने विशेष ट्रेन से ट्रायल किया था। ट्रायल के दौरान सुबह 8.45 बजे भटनी से रवाना होकर औड़िहार तक 100 किमी गति से ट्रेन चलाया गया था।
विद्युतीकरण कार्य समय सीमा पूरा होने के बाद जिले की विकास गति तेज होने की आस जगी है। इससे जनपदवासियों में खुशी का माहौल है। मऊ जंक्शन से होकर वाराणसी तथा शाहगंज छपरा होकर 56 ट्रेनें गुजरती हैं। ट्रेनों की लेटलतीफी तथा कम गति के चलते यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। भटनी-वाराणसी रेल मार्गो पर विद्युतीकरण कराने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। विद्युतीकरण का कार्य हो जाने से ट्रेनों की रफ्तार में वृद्धि हुई इससे समय पालन सुनिश्चित करने में सहूलियत मिल रही है।
इस बाबत पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि वाराणसी-भटनी रूट पर विद्युतीकरण कार्य पूरा हो चुका है, छपरा-शाहगंज रूट पर विद्युतीकरण कार्य अंतिम दौर में है। विद्युतीकरण होने से ट्रेनों की गति बढ़ने के साथ डीजल की बचत हो रही है।