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Mau News: भीषण गर्मी में बुजुर्ग हो रहे बीमार, ओपीडी में 200 मरीज आए

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मऊ। जिले में भीषण गर्मी का कहर जारी रहने से बुजुर्ग रोगियों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। वहीं गंभीर रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में 800 से 900 की ओपीडी में लगभग 150 से 200 संख्या बुजुर्ग मरीजों की होती है। तेज धूप व गर्मी का कहर जानलेवा साबित हो रहा है। इस बार सांस रोगी, हृदय रोगी सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित बुजुर्गों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। पूर्व में सर्दी के मौसम में सांस फूलने के कारण अटैक की संभावना अधिक होती थी। अनुमान है कि डॉक्टरों को बीमारी का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। जिला अस्पताल में 800 से 900 की ओपीडी हो रही है। प्रतिदिन लगभग 150 से 200 बुजुर्ग मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार ज्यादातर मरीज सांस, हृदय रोगी, ब्लड प्रेशर, शुगर सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हैं। डॉक्टरों की मानें तो गर्मी में लोग घर के अंदर एसी, कूलर का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन वह जैसे ही बाहर निकलते हैं, तापमान में काफी अंतर है। इसके साथ ठंडा पानी या मौसम के बदलाव से बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। इससे पुराने सांस, हृदय रोगी और बुजुर्गों की एकदम से तबीयत बिगड़ रही है। चिकित्सक मरीजों व तीमारदारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि गर्मी में बुजर्ग, हृदय रोगी और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। एक दिन में कम से कम पांच से सात लीटर पानी पीएं। ताजे फलों का सेवन करें, नींबू पानी, शिकंजी, ओआरएस थोड़ी-थोड़ी देर में पीते रहें। दोपहर में घर से बाहर बिल्कुल न निकलें। अगर निकलना पड़े तो सिर और शरीर को ढक कर ही निकलें। एसी और कूलर वाले स्थान से निकल कर अचानक धूप में न जाएं और न ही धूप से आते ही ऐसे स्थान पर जाएं। शरीर का तापमान सामान्य होने पर ही जाएं। गर्मी से आकर ठंडा पानी का प्रयोग करना सेहत के लिए खतरनाक है।
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जिला अस्पताल जीरियाट्रिक वॉर्ड बंद होने से बुजुर्ग मरीज परेशान

मऊ। जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों के लिए खास तौर पर जीरियाट्रिक वॉर्ड बनाया गया था। लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से वार्ड को बंद कर दिया गया है। इससे बुजुर्ग मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक ही छत के नीचे बुजुर्ग मरीजों के इलाज संबंधी हर सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्हें दवा से लेकर चेकअप तक को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सब कुछ जानकर विभागीय अधिकारी मौन हैं।
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