बदलते मौसम का असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। बारिश के बाद पारे में गिरावट से जिला अस्पताल में बुखार और सिरदर्द के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बुखार के मरीजों की रक्त जांच भी करानी पड़ रही है।
यही स्थिति जनपद की सभी सीएचसी पर भी है, जहां आवश्यकता अनुसार मरीजों की रक्त जांच कराई जा रही है। अप्रैल माह में पारा 40 डिग्री के पार होने के बाद माह के अंत में तापमान में गिरावट आई और मई माह की शुरुआत से ही बूंदाबांदी और बारिश के कारण तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
रविवार को बंद रहने के बाद सोमवार को अस्पताल खुलते ही सुबह से मरीज पर्ची कटाने के लिए लाइन में लगे रहे। सोमवार को करीब 948 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें बुखार और सिरदर्द के मरीजों की संख्या अधिक रही। चिकित्सकों के अनुसार यह असर मौसम में बदलाव के कारण हो रहा है।
डॉ. शैलेष ने बताया कि संक्रमण काल में शरीर को मौसम के अनुरूप ढलने में समय लगता है। तापमान में कमी आने से प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे वायरस श्वसन तंत्र में तेजी से फैलते हैं। इसके कारण वायरल बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और छींक आने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। साथ ही तापमान और नमी में बदलाव से एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों के मामले भी बढ़े हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे मौसम में दिनचर्या में बदलाव से भी सेहत प्रभावित होती है। ठंड लगने के बाद होने वाले बुखार को हल्के में न लें और चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवा का सेवन करें।