रामलीला समिति दोहरीघाट की तरफ से चल रही राम लीला में रावण कुंभकर्ण तथा विभीषण की तपस्या सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रावण के अत्याचार का मंचन देख दर्शकों की आंखे नम हो गई। ब्रह्मा की कठोर तपस्या की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने तीनों भाइयो से वरदान मांगने को कहा। जिस पर रावण ने अजेय, कुंभकर्ण ने छह माह सोने व छह माह जागने का तथ विभीषण ने प्रभु श्री राम की भक्ति का वरदान मांगा। ब्रह्मा द्वारा अजेय होने का वरदान पाकर रावण अत्याचारी हो गया।वह ऋषि मुनियों, महिलाओं पर अत्याचार करने लगा ।उसके अत्याचार से पूरा धरती कांप उठी। देवता व ऋषि उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। जिस पर ब्रह्मा ने कहा कि भगवान विष्णु प्रभु श्री राम के रूप में धरती पर मनुष्य के रूप में अयोध्या में जन्म लेंगे तथा धरती को रावण के अत्याचार से मुक्त कर देवता मुनियो का उद्धार करेंगे।
श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर के बाबाबिहारी दास मंदिर से छोटका पोखरा तक हुई राम लीला में श्रीराम वनगमन, राम संवाद, श्रृंगवेरपुर निवास सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। राम वन गमन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। मंथरा ने कैकयी को भरत को राज्य लेने के लिए समझाया तो कैकयी कोप भवन में रूठ कर चली गईं। जहां उन्होंने राजा दशरथ से राम के लिए वनवास मांगा और भरत को राज। पिता के मान को महत्व देते हुए राम ने उनके वचनों की लाज रखी। राम सीता व लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान किया। राम के वन जाने के दौरान दशरथ का कारुणिक विलाप और सुमंत द्वारा राम को वापस अयोध्या चलने की रामलीला में कई जगह भावपूर्ण और कारुणिक दृश्यों को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। भगवान श्री राम सरयू नदी किनारे खड़े केवट से नदी पार करने के लिए नाव में बिठाने का आग्रह करने लगे। केवट प्रभु श्री राम के पास आया और बोला कि आप कौन हैं कहां से हैं और कहां जा रहे हैं। अपना परिचय दीजिए। प्रभु श्री राम ने केवट को अपना परिचय दिया तो केवट वहां से भाग कर दूर हो गया और कहा कि आप वही राम हैं जिनके छूते ही पत्थर की शिला आसमान में उड़ गई। मेरी नाव काठ की है यह तो छूमंतर हो जाएगी। मैं अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा। आपका चरण धोकर ही नाव में बैठाकर पार कराऊंगा। भगवान राम के आदेश पर केवट ने पहले प्रभु के चरण धोकर चरणामृत ग्रहण किया फिर उन्हें सरयू पार कराया।
ताड़का वध होते ही जयश्रीराम की जयकारे से गूंज उठा पंडाल:
श्रीराम बाल लीला एवं दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में नगर के रेलवे मैदान में चल रही रामलीला में पृथ्वी पुकार, रामजन्म, मुनि आगमन, ताड़का वध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रामजन्म पर महिलाओं ने सोहर गीत गया। ताड़का वध होते ही जयश्रीराम के जयकारे से पंडाल गूंज उठा। रामलीला में चौथापन देख राजा दशरथ चिंतित रहते हैं। ऋषि महर्षियों की शरण में जाते हैं। कुछ दिन बाद राजा को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न का जन्म होता है। जन्म होते ही पंडाल में मौजूद दर्शक भाव विह्वल होकर जयकारा लगाने लगते हैं। महिलाएं थाली बजाने लगती हैँ। महिलाएं मंगल गीत गाने लगती हैं। राक्षसों के उत्पात से त्रस्त मुनि विश्वामित्र धर्म की रक्षा के लिए अवतरित हुए राम लक्ष्मण को मांगने के लिए अयोध्या के राजा दशरथ के पास पहुंचते हैं। उनकी मंशा जान राजा पहले संकोच करते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ के आदेश पर राम लक्ष्मण को मुनि विश्वामित्र को सौंप देते हैं। मुनि विश्वामित्र दोनों राजकुमारों को लेकर आश्रम की तरफ बढ़ते हैं। रास्ते में राक्षसी ताडक़ा को मनुष्य का गंध मिलते ही उन पर हमला बोलती है, जहां उक्त राजकुमारों द्वारा उसका संहार कर दिया जाता है। ताड़का वध होते ही जयश्रीराम के गूंज से पंडाल गूंज उठा।