मऊ। भटनी-वाराणसी रेलखंड पर बीते दो महीने से मऊ से दुल्लहपुर तक 20 किमी रेल लाइन का निर्माण सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
158 किमी लंबी दूसरी रेललाइन में केवल मऊ से दुल्लहपुर के बीच ही काम बच गया था। दोनों का लाइन चालू होने के बाद रेलवे अतिरिक्त ट्रेनें चलाएगा, साथ ही पास देने के लिए ट्रेनों का अनावश्यक ठहराव भी नहीं होगा। भटनी-वाराणसी रेलखंड पर मऊ होते हुए वाराणसी और मुंबई जाने वाली 16 ट्रेनों का संचालन होता है। बलिया और बिहार से आने वाली दो ट्रेन इस रेलमार्ग पर चलती है।
बीते कई साल से दूसरी लाइन का निर्माण चल रहा था। 18 से 20 किमी का पार्ट बनाकर एक बार में निर्माण पूरा किया गया। बीते मार्च में दुल्लहपुर-सादात-दुल्लहपुर के बीच 18 किमी तक दोहरीकरण और ट्रायल पूरा हुआ था। केवल मऊ से दुल्लहपुर के बीच काम बच गया था।
दोहरीकरण के साथ ही छोटे बड़े रेलवे स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक भी बढ़ाया जा रहा है। दोहरीकरण से एक ही ट्रैक पर अधिक ट्रेनों को चलाया जा सकता है, जिससे रेलवे की क्षमता बढ़ती है। एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का सभी स्टेशनों पर ठहराव नहीं होता है। लेकिन पास नहीं मिलने पर अनावश्यक किसी भी जगह ट्रेन को रोकना पड़ता है, जिसके चलते ट्रेन निर्धारित समय से देरी में गंतव्य तक पहुंचती है। सिंगल लाइन के चलते सबसे अधिक समस्या स्पेशल ट्रेनों को होती है। दोहरीकरण से ट्रेनों को एक निर्धारित समय पर और नियमित रूप से संचालित करने में मदद मिलती है।
एक दिशा में आने-जाने के लिए अलग-अलग ट्रैक मिल जाते हैं, जिससे ट्रेन बिना रुके तेजी से चल सकती हैं। दोहरीकरण के बाद अधिक क्षमता से ट्रेनों को एक ही समय में चला पाना संभव हो जाएगा। यह रेलवे की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे अधिक यात्री ट्रेनें और माल गाड़ियां चल सकेंगी, साथ ही यात्रा का समय भी कम होगा।