दोहरीघाट कस्बे के राजकीय पशु चिकित्सालय विभागीय उपेक्षा के चलते बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। यहां न तो पशु चिकित्सक के बैठने की उचित व्यवस्था है और न ही पशुओं के उपचार की समुचित सुविधा।
भवन जर्जर होने से आए दिन प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, वहीं बारिश के दिनों में छत से पानी झरने की तरह कमरों में टपकता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पशुपालकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 1965 में लाखों रुपये की लागत से पशुपालन विभाग द्वारा राजकीय पशु चिकित्सालय का निर्माण कराया गया था, जिसमें दो कमरे और एक छोटा बरामदा बनाया गया था।
कस्बा निवासी महेश कुमार, दिव्य प्रकाश, सुरेश सोनकर और नरेश गुप्ता ने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है। खंड विकास अधिकारी विकास शुक्ला ने बताया कि पशुपालन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है।