मऊ। ठंड के मौसम में आम दिनों की तुलना में कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी में अभी तक महज 18 दिनों में जिला अस्पताल के साथ जनपद की सभी सीएचसी को मिलाकर 5684 केस आ चुके हैं। इसमें जिला अस्पताल में 1750 केस आएं है, जबकि बलिया की सीमा से सटे फतेहपुर मंडाव सीएचसी पर जनवरी माह में 1782 मामले आ चुके हैं। यहां आने वाले मामलों की संख्या जिला अस्पताल से भी अधिक है। ड्रग वेयर हाउस के साथ जिला अस्पताल और सभी सीएचसी को मिलाकर कुल 17390 वायल एंटी रैबीज के उपलब्ध हैं।
विभाग का दावा है कि जिला अस्पताल सहित अन्य सभी सीएचसी पर एंटी रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। ठंड में डॉग बाइट के मामले बढ़ने के बाद से विभाग की तरफ से जिला अस्पताल के साथ सभी सीएचसी पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने के लिए उपलब्ध कराया गया है। विभाग का कहना है कि अन्य दिनों की अपेक्षा ठंड के मौसम में कुत्ते ज्यादा हमले करते हैं। कुत्तों से जरा भी छेड़खानी उनको नागवार लगती है और वह हमला कर काट देते हैं। ऐसे में एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है। चिकित्सक की तरफ से सलाह दी जा रही है कि कुत्ते के काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज का इंजेक्शन आवश्यक रूप से लगा लेना चाहिए। पहली सुई लगने के बाद चिकित्सक की सलाह पर तीसरे, सातवें 14 वें और 29 वें दिन भी इंजेक्शन लगवाना चाहिए। शरीर में जहां पर भी कुत्ता काटे उस जगह को तत्काल साबुन से धोएं। घाव को सुखाने के लिए किसी भी मरहम को लगाने के बाद रैबीज का असर कम हो जाता है। जिला अस्पताल में बीते तीन माह के आकड़ों पर गौर करें तो अक्तूबर में यहां 1825 लोगों को एंटी रैबीज की इंजेक्शन लगाया गया। जबकि नवंबर माह में 2210 ऐसे मामले जिला अस्पताल में आए। वहीं दिसंबर माह में यह आकड़ा बढ़कर करीब 2860 पहुंच गया।
-
सीएचसीवार मरीज और उपलब्ध वायल
सीएचसी - केस - मौजूद वायल
फतेहपुर मंडाव - 1782 - 200
घोसी - 846 - 150
रतनपुरा - 638 - 150
कोपागंज - 510 - 200
रानीपुर - 407 - 130
दोहरीघाट - 342 - 182
मुहम्मदाबाद गोहना - 300 - 190
परदहां - 188 - 250
बड़रांव - 89 - 120
मझवारा - 00 - 00
ठंड में आमतौर पर कुत्तों के काटने मामले बढ़ जाते हैं। जिला अस्पताल के साथ सभी सीएचसी पर एंटी रैबीज उपलब्ध हैं। एक केस में करीब प्वाइंट पांच एमएल दवा का प्रयोग होता है। घाव को देखने के बाद चिकित्सक द्वारा तय किया जाता है, इंजेक्शन कितनी बार लगाई जाए।
- डा. राहुल सिंह, सीएमओ मऊ