जिला अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही एक बार फिर उस समय सामने आई जब जिलाधिकारी चंद्रकांत पांडेय औचक निरीक्षण करने पहुंच गए।
गुरुवार को अस्पताल से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सहित कई डाक्टर अनुपस्थित थे। एक फार्मासिस्ट के खिलाफ मरीजों ने शिकायत की कि वह एआरवी का इंजेक्शन लगाने के लिए बीस-बीस रुपये लेता है।
इसपर डीएम ने उक्त फार्मासिस्ट को निलंबित करने का आदेश दिया। सीएमएस सहित गैर हाजिर सभी डाक्टरों का एक माह का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी चंद्रकांत पांडेय सुबह 10.25 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उस समय स्वयं सीएमएस डा. एके पांडेय गैरहाजिर थे। डा. सीएस साहनी और डा. आरके गुप्ता भी अपनी ड्यूटी पर नहीं थे।
उनके कक्ष खाली थे। इसके बाद डीएम ओपीडी में मरीजों को देख रहे वरिष्ठ फिजिशीयन डा. आरएम मिश्र के कक्ष में गए, जहां पर भारी भीड़ थी। वहां डीएम ने मरीजों से पूछताछ की और उनके परचे देखे।
इसके बाद डीएम एआरवी कक्ष में गए, जहां पर कुत्तों के काटने से पीड़ित मरीजों की भारी भीड़ रही। जहां मौजूद संतोष कुमार, जयकेश चौहान और राम प्रवेश सहित दर्जन भर लोगों ने शिकायत की कि यहां प्रत्येक मरीजों से बीस बीस रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
डीएम ने एआरवी काउंटर पर तैनात फार्मासिस्ट आरपी शाही से पूछा तो उसने बताया कि ये रुपये वसूले नहीं जा रहे बल्कि लोग खुशी से दे रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने फार्मासिस्ट को निलंबित करने का आदेश दिया।
डीएम ने अस्पताल में गंदगी देखने पर नाराजगी जताते हुए अपेक्षित सफाई के निर्देश दिए।
दवाइयों की बेहतर आपूर्ति करने की भी हिदायत दी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार के निरीक्षण में खामियां मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।