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जिले भर के डाक्टरों और चिकित्साकर्मियों को नहीं मिला वेतन

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मऊ। जनपद के सभी सीएचसी और पीएचसी सहित विभिन्न स्थानों पर तैनात सरकारी डाक्टरों को जुलाई महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। इसके साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों का भी वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा संविदा पर तैनात चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों को कई महीने से वेतन नहीं दिया गया है। कई पीएचसी और सीएचसी से बाबुओं ने वेतन बिल ही समय से नहीं भेजा। 30 जून से पहले ही स्वास्थ्य विभाग में तैनात बाबुओं का तबादला अन्य जिलों में हो गया है। यहां कार्यरत सीएमओ भी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने से भी वेतन भुगतान प्रभावित हुआ। समय से वेतन न मिलने से डाक्टरों और कर्मचारियों को आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कर्मचारी नेताओं ने विभागीय सुस्ती पर नाराजगी जताया है। सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी पीएचसी सहित अन्य अस्पतालों पर 115 चिकित्सकों तथा लगभग 1200 कर्मचारियों की तैनाती है। विभागीय नियमानुसार महीने की प्रत्येक 25 तरीख तक वेतन बिल ट्रेजरी में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसके बाद वेतन बिल को विलंब का कारण बताते हुए जिलाधिकारीके समक्ष प्रस्तुत करना होगा। उनकी संस्तुति के बाद ही ट्रेजरी को वेतन बिल भेजा जाना है। आठ मार्च तक सीएमओ आफिस से वेतन बिल नहीं बना था। इसके चलते रतनपुरा, मुहम्मदाबाद गोहना, रानीपुर, कोपागंज,घोसी, बड़रावं, दोहरीघाट, फतेहपुर मंडाव, परदहा, मझवारा, नेमड़ांड़ सीएचसी सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन नहीं मिला है। सीएमओ डॉ. जीसी पाठक ने बताया कि सीएचसी के अधीक्षकों से तत्काल वेतन बिल भेजने को कहा गया है। जिस सीएचसी से बिल नहीं आएगी, उसे छोड़कर अन्य अस्पतालों के बिल भुगतान के लिए भेज दिए जाएंगे।
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विलंब के कारण के साथ वेतन बिल डीएम को भेजा जाए
मऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष रामाश्रय यादव ने कहा है कि डीएम के आदेश के अनुसार प्रत्येक माह की 25 तारीख तक वेतन बिल ट्रेजरी में न भेजे जाने की स्थिति में संस्तुति के लिए जिलाधिकारी के पास भेजा जाना है। इस महीने हुई देरी का कारण बताते हुए वेतन बिल संस्तुति के लिए पहले डीएम के पास भेजना जाना चाहिए।
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