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शून्य हो सकता है डीएलएड का नया शिक्षा सत्र:

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मऊ। सरकारी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूलों में अध्यापन के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के 2020-21 शिक्षा सत्र में प्रवेश प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। कोरोना काल में शिक्षण सत्र शून्य होने संभावना प्रबल हो गई है। प्रवेश को लेकर जहां स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं परेशान हैं। वहीं शिक्षण सत्र शून्य होने की स्थिति में डीएलएड कॉलेज प्रशासन के समक्ष वित्तीय संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।
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जिले में डायट सहित डीएलएड के 92 से अधिक निजी कॉलेज हैं। स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए डीएलएड में लगभग सात हजार सीटें हैं। कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया हर साल मई में शुरू हो जाती हैं। दो महीने में सारी औपचारिकताएं पूरी कर जुलाई से सत्र शुरू होता है। सूत्रों के अनुसार लगभग एक सेमेस्टर का समय बीत चुका है और अभी प्रवेश प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में कोरोना संक्रमण काल में शिक्षा सत्र शून्य होने की संभावना प्रबल हो गई है।
इस संबंध में राजकुमारी शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य संदीप सिंह का कहना है कि नया शिक्षा सत्र शुरू न होने की स्थिति में शिक्षकों, कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि फीस से ही व्यवस्था संचालित होती है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य प्रभुनाथ चौहान का कहना है कि डीएलएड के नए शिक्षा सत्र के लिए अभी शासन से आदेश नहीं मिला है।
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कोरोना काल में डीएलएड का शिक्षा सत्र शुरू न होने से छात्र छात्राओं को चिंता सताने लगी है। इस संबंध में दुबारी गांव निवासी पूजा गोंड़ का कहना है कि आधा शिक्षा सत्र बीत गया। डीएलएड में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। पूरा वर्ष बेकार होने की संभावना बढ़ गई है।
सूरजपुर निवासी अलका विश्वकर्मा का कहना है कि शिक्षक बनने की तमन्ना है लेकिन अभी तक डीएलएड के नए शिक्षासत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। डीएलएड में एडमिशन के लिए अन्य कोर्स में प्रवेश नहीं ली हूं। कब तक प्रक्रिया शुरू होगी पता नहीं चल पा रहा है। दुबारी निवासी आलोक सिंह का कहना है कि डीएलएड में प्रवेश प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाए ताकि प्रशिक्षण लेकर शिक्षक बनने का सपना साकार हो सके।
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