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सांप्रदायिकता के विरुद्ध राज्य की भूमिका पर विमर्श

Fri, 25 Aug 2017 11:29 PM IST
mau news
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मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ एवं जन संस्कृति मंच  के संयुक्त तत्वावधान में विचार गोष्ठी का आयोजन एम.ए. ए फाउण्डेशन  
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डोमनपुरा पर हुआ। इसमें सांप्रदायिकता के विरुद्ध राज्य की भूमिका और असहिष्णुता पर चर्चा की गई।
अध्यक्षीय संबोधन में कथाकार विभूतिनारायण राय ने कहा कि इस समय पूरे दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादतियां हो रही हैं। जबकि हम दुनिया के सबसे बड़े दो धर्म लंबे समय से साथ रहने के अभ्यासी रहे हैं और हमारे सहयोग से दुनिया की बेहतरीन चीजें पैदा हुई हैं। स्वतंत्रता के बाद जब भारत धर्मनिरपेक्ष स्टेट बना तो तय हुआ कि राज्य सांप्रदायिकता के विरुद्ध काम करेगा लेकिन दुर्भाग्य है कि राज्य ने अपनी भूमि का पूरी तरह नहीं निभायी। हम सेकुलर होकर ईसाई और मुसलमानों पर एहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि खुद पर एहसान कर रहे हैं।
अरविंद मूर्ति ने विमर्श में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दों पर बातें खुलकर होनी चाहिए और उसकी शिनाख्त भी होनी चाहिए कि
पाकिस्तान व भारत में इन उग्रवादी व असहिष्णु जमातों को खाद पानी तथा सुविधाएँ कौन दे रहा है। आजमगढ़ से से आए जयप्रकाश नारायण ने कहा कि सांझी विरासत की हिफाजत के लिए एक साझा मंच से साझी लड़ाई शुरू की जानी चाहिए। तीनों मुल्क पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश ने आजादी की लड़ाई साझा लड़ी थी। साझा ही अखण्ड भारत का सपना निर्मित हुआ था। यह सपना 1947 की आजादी के बाद
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टूट गया। यह टूटा हुआ विजन ही हमारी प्रेरणा प्रस्थान विंदु बना और जो दुश्मन इग्लैंड में था। वह खिसक कर पड़ोस में आ गया।
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि संपूर्ण दक्षिणी एशिया में धार्मिक कट्टरता इस समय चर्चा का विषय है। सरकारें भी प्रकारांतर से उसमें सहयोग कर रही हैं।
गोष्ठी में डॉ. इम्तेयाज नदीम ने कहा कि नफरत में रहते हुए बहुत दिनों तक नहीं चला जा सकता है। सरहद के इस पार या फिर उस पार जो
खून खराबा और दहशत गर्दी चलायी जा रही है। उसके पीछे की सियासत को समझने की जरूरत है।,संजय राय ने कहा कि  सत्ता और अर्थव्यवस्था पर जो एकक्षत्र राज चलाने की मुहिम चल रही है उससे लड़ने की जरूरत है। यह लड़ाई तालीम की बुनियाद पर लड़नी
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होगी। सच्चाई और ईमानदारी से दिलों को जोड़ने का समय है तभी दहशतगर्दी को खत्म किया जा सकता है।
इस अवसर पर डॉ.श्रीप्रकाश राय,शकील अहमद, तैयब पालकी, ओवैश तरफदार, वीरेन्द्र कुमार, बसन्त कुमार, समसुलहक चौधरी, अजीम खाँ, लक्ष्मी चौरसिया, राधवेन्द्र प्रताप सिंह,मनोज , नफीस अहमद, रामकृष्ण यादव आदि उपस्थित रहे।
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