मऊ। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में दिव्यांंग विद्यार्थियों के नामांकन के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। विभाग की तरफ से स्पेशल एजुकेटरों को दिव्यांग बच्चों का सर्वे करने के लिए नामित किया गया है।
स्पेशल एजुकेटर बच्चों को चिह्नित करने के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग से सूची प्राप्त कर खंड शिक्षा अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला कराएंगे। विद्यार्थियों का नामांकन कराने में स्पेशल एजुकेटर्स का सहयोग प्रधानाचार्य करेंगे।
जिले में 17 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त और 436 माध्यमिक विद्यालय हैं। दिव्यांग छात्र छात्राओं को राज्य परियोजना की ओर से नि:शुल्क ब्रेल स्टेशनरी, रीडर एलाउंस, ट्रांसपोर्ट एलाउंस आदि की सुविधा दी जाती है। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में दिव्यांंग विद्यार्थियों के नामांकन के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। शासन की तरफ से छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा अधिकार से वंचित न रह जाए। इसके लिए विभागीय कवायद तेज हो गई है। विभाग की तरफ से ऐसे छात्र-छात्राओं को चिह्नित कर विद्यालयों में नामांकन कराने का निर्देश दिया गया है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत उन्हें निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराए जाने व्यवस्था की गई है। सत्र 2025-26 में दिव्यांग विद्यार्थियों को चिंहित कर माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों की मानें तो निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में छह से 18 वर्ष तक प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी का निकटवर्ती विद्यालय या उसकी पसंद के किसी विशेष विद्यालय में निःशुल्क शिक्षा का अधिकार होगा।
जनपद स्तर पर समग्र शिक्षा माध्यमिक अभियान में स्पेशल एजूकेटर्स की व्यवस्था की गई है, जिनका दायित्व दिव्यांग विद्यार्थियों का चिंहांकन कर उनके निकटवर्ती राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पंजीकरण कराना है। ऐसे में सभी प्रधानाचार्य स्पेशल एजुकेटर्स के इस कार्य में सहयोग करेंगे। इस बाबत जिला समन्वयक समग्र शिक्षा माध्यमिक सीपी श्रीवास्तव का कहना है कि माध्यमिक विद्यालयों में दिव्यांंग विद्यार्थियों के नामांकन के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। दिव्यांग बच्चों को चिंहित करने के लिए स्पेशल एजुकेटर्स को दिशा निर्देश दिया गया है।