नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में गोवर्धन पूजा तथा भइया दूज का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। शुक्रवार को भाई की मंगल कामना को लेकर बहनों ने व्रत रखा और भगवान गणपति की पूजा की।
शुक्रवार की सुबह ही बहनें स्नान कर निर्जला व्रत का संकल्प लिया और भगवान गणेश का पूूजन अर्चन कर भाइयों के लंबी उम्र की कामना की। उनके आजीवन स्वस्थ रहने की प्रार्थना की। भाई को माथे पर टीका लगाकर आरती उतारी और उनका मुंह मीठा कराया। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजभूमि के लोगों से गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा था।
भगवान इंद्र ने किसी बात से क्रुद्ध होकर ब्रजवासियों पर कहर ढाना शुरू कर दिया, तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर रक्षा की थी। तभी से गोवर्धन पूजा शुरू हुई। इसी मान्यता के तहत नगर के भीटी, सहादतपुरा, मुंशीपुरा, ब्राह्मणटोला सहित दर्जनों मुहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने विधि विधान पूर्वक गोवर्धन पूजा की।
रतनपुरा संवाददाता के अनुसार ब्लाक मुख्यालय सहित क्षेत्र के नगवा, बीबीपुर, गाढ़ा, रतनपुरा, मुबारकपुर, धर्मागतपुर, गुलौरी, जोगापुर, दतौड़ा, खोहिया सहित विभिन्न इलाकों में गोवर्धन पूजा व भैया दूज का पर्व श्रद्घापूर्ण ढंग से मनाया गया। बहनों ने व्रत रख कर भाइयों के लंबी उम्र की कामना की। इस अवसर पर अच्छे अच्छे पकवान बनाए गए।
इस अवसर पर भाइयों ने छोटी बहनों को उपहार भी दिये। पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह भी देखा गया। भैया दूज को मनाने के लिए घरों में साफ सफाई कर के गाय के गोबर से घर के फर्शो की पुताई की गई। बहनों ने व्रत रखा, पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद देर शाम भाइयों को भोजन कराने के बाद पारण किया।
सरसेना संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में गोवर्धन पूजा व भइया दूज का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न गांवो में गोवर्धन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। क्षेत्र के कहिनौर, पिपरीडीह, भार,रैकवार डीह, भार, सुअराबोझ, खरगजेपुर सहित दर्जनों गांवों में महिलाओं ने गोलाकार आकृति बनाकर कथा सुनी और विधि विधान से गोवर्धन पूजा की।
मधुबन संवाददाता के अनुसार मधुबन एवं आसपास के क्षेत्रों में दीपावली गोवर्धन पूजा व भैयादूज का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।कस्बा सहित दर्जनों जगहों पर छोटे बड़े दस दर्जन से अधिक पंडालों में माता लक्ष्मी व गणेश की प्रतिमाएं रखी गयी थीं।अधिकांशत: इस पूजा में छोटे छोटे बच्चों ने पूजा पंडालों में पूजन हवन कराकर मां लक्ष्मी की आराधना की और बाद में इनकी विदाई की।अधिकांश मूर्तियां शुक्रवार को विसर्जित कर दी गईं थीं।