जिस गेंदे की माला का दाम कुछ दिन पूर्व महज दस रुपये से लेकर 20 रुपये तक था वह दीपावली के दिन दूने से भी अधिक 40 से 50 रुपये में बिका।
100 रुपये जोड़ा के रेट से बिके गेंदे की माला देखकर लोग चौक जा रहे थे। बावजूद इसके दीपावली पर फूलों की अनिवार्यता को देखते हुए उन्होंने इसकी खरीददारी की।
यही हाल कमोवेश अन्य फूलों की माला का भी रहा लेकिन सबसे अधिक डिमांड बाजार में गेंदे की माला की रही। इसके चलते सुबह से ही फूल की मंडी में लोगों की भीड़ उमड़ गई थी।
दीपावली को लेकर अंतिम दिन खरीददारी को लेकर बाजारों में गुरुवार को सुबह से ही भीड़ होनी शुरू हो गई थी। फूल की मंडी हो या बाजार में मिठाइयों की दूकान सभी पर खरीददार उमड़े हुए थे।
बाजार में शाम होते-होते तो मिठाइयां छू मंतर हो गई। पटाखा के रेट महंगाई के दौर में अधिक होने के बावजूद लोगों ने जी भरके खरीदारी की। पटाखों में बच्चों की पसंद जहां फुलझड़ी, चुटपुटियां, मुर्गाछाप पटाखे, चर्खी रहे वहीं बड़े भी पीछे नहीं रहे।
राकेट, बम जैसे तेज आवाज वाले पटाखों की भी जमकर बिक्री हुई। नगर के सोनीधापा मैदान में सभी दुकानें एक साथ लगाई गई थी ताकि आग लगने पर भी मैदान होने के चलते उस पर काबू पाया जा सके। बाजार में तरह-तरह की रंगीन मोमबत्ती के साथ ही अगरबत्ती एवं धूपबत्ती की भी जबरदस्त मांग रही।