कलेक्ट्रेट पर मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध मार्च के दौरान प्रदर्शन करते संयुक्त किसा?
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मऊ। डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि के विरोध में वामदलों ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर मूल्य वृद्धि वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों के कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसे समय में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाए हैं जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दामों में उछाल का मुख्य कारण केंद्र सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी में 38 प्रतिशत की वृद्धि करना है। 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद से अब तक डीजल-पेट्रोल पर लगभग 217 प्रतिशत टैक्स की वृद्धि की गई है। पेट्रोलियम पदार्थों में की गई वृद्धि महामारी और आर्थिक मंदी की दोहरीमार झेल रही जनता पर बड़ा बोझ है। वर्ष 2020-2021 के बजट में पूंजीपतियों और अमीरों को टैक्स में पिछले वर्ष के मुकाबले 2.11 लाख करोड़ की रियायत दी गयी है, जिसकी भरपाई सरकार डीजल-पेट्रोल के दामों की वृद्धि करके जनता से वसूल रही है। डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि से सभी आवश्यक सामानों के दाम बढ़ने लगे है। साथ ही यात्रा महंगी होगी। इससे जनता की दुश्वारियां और बढ़ेंगी। केंद्र और प्रदेश की सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने की जगह अपना पूरा जोर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के दमन पर लगा रही है। प्रदर्शन में अर्चना उपाध्याय, सरोज सिंह, वीरेंद्र कुमार, बसंत कुमार, शेर मोहम्मद, रामजी सिंह, प्रदीप, समसुल हक चौधरी, श्यामदेव, शिवमूरत, हरिश्चंद, देवनाथ यादव, सुरेश, जंगबहादुर, पिंटू, मनोज, अरविंद, सिंटू, प्रमिला, अजमल, इमरान शामिल रहे।