विभिन्न मांगों को लेकर किया प्रदर्शन
स्कूल संचालकों पर मनमानी करने का आरोप, जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा
शुल्क नियामक समिति के गठन की उठाई आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। अभिभावक छात्र एकता मंच के लोगों ने सरकार के मानकों, दिशानिर्देशों जैसे बैग वजन, शिक्षकों की योग्यता, एनसीआरटी की पुस्तकों को पढ़ाने, शुल्क नियामक समिति का गठन करने, कोरोना काल की शुल्क माफी तथा गलत तरीके से दर्ज मुकदमों को हटाने की मांग को लेकर शनिवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने के लिए जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। अभिभावक छात्र एकता मंच के राजविजय यादव ने आरोप लगाया कि जन जागरूकता अभियान चलाए जाने से बौखलाए निजी विद्यालय प्रबंधकों ने संगठित होकर अभियान को बंद करवाने के लिए पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से विभिन्न धाराओं के तहत गलत तरीके से मुकदमा दर्ज करवाया है। उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह आरोप भी लगाया कि सरकार की तरफ से जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन से प्रबंधकों को बचाने एवं उनकी मनमानी को जारी रखने के लिए पुलिस पक्षपात पूर्ण ढंग से कार्य कर रही है। गलत मुकदमे दर्ज कराकर पुलिस प्रशासन की तरफ से मंच के लोगों पर दबाव डाला जा रहा है। यह आरोप भी लगाया कि गुंडा एक्ट लगाने तक लगाने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराकर इसे समाप्त कराने की मांग की।
रविंद्र कुमार साहनी ने कहा कि मंच के लोग शासनादेश को अभिभावकों के बीच में ले जाने का काम कर रहे हैं। दीपक चंद्रा ने निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों को पढ़ाना अनिवार्य किए जाने की मांग की। प्राइवेट प्रकाशकों की एनसीईआरटी पैटर्न पर प्रकाशित की गई महंगी पुस्तकों को पढ़ाने पर रोक लगाने, स्कूल फीस व अन्य शुल्कों के अलावा भाड़ा निर्धारित करने के लिए जिला शुल्क नियामक समिति गठित किए जाने की मांग भी की। समिति में जिला प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के प्रतिनिधि को शामिल किए जाने, बच्चों के बैग के वजन से संबंधित मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग भी की। ज्ञापन देने वालों में गगन कुमार, बलवंत यादव, संगम राज, विक्की कुमार, विजय बहादुर साहनी, अमित गौण, सोनू यादव, साधु यादव आशुतोष ,गोलू, पंकज आदि शामिल रहे।