ज्ञापन सौंपते शैक्षिक महासंघ के सदस्य: सोर्स स्वयं
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पुनर्विचार याचिका पर 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के अनुसार सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो गया है। इसमें आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त पुराने शिक्षक भी शामिल हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार पूर्व में विभिन्न राज्यों में विधिवत संपन्न नियुक्तियों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
देशभर के राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों और पात्रताओं के अनुरूप पूर्णतः वैध थीं।
ज्ञापन में मांग की गई कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में उपेंद्र नाथ तिवारी, गिरीश चंद्र कुशवाहा, राजेश गुप्त, शिव प्रसाद आर्य, राजकिशोर प्रसाद, रामरतन राम, बृजभूषण मौर्य आदि शामिल थे।