गहरी राजनीतिक समझ ने पहुंचाया शिखर पर
प्रदेश में प्रचंड बहुमत से बनने वाली भाजपा सरकार में दारा चौहान को कैबिनेट मंत्री चुने जाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। दारा चौहान का राजनीतिक सफर वैसे तो बसपा से रहा है लेकिन सपा से लेकर भाजपा में रहने पर भी उन्होंने अपने अनुभवों का एहसास कराया, और बड़े नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। बसपा में संसदीय दल से नेता तो भाजपा ने उन्हें पिछड़ा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना कर बड़ा दायित्व सौंपा है। चुनाव जीतने के बाद कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद एक बार फिर उन्होंने अपने श्रेष्ठता साबित किया।
अभी तक लोकसभा एवं राज्यसभा की केंद्रीय राजनीति कर रहे दारा चौहान को हालांकि प्रदेश की राजनीति एवं प्रदेश की सरकार में यह उनका पहला कदम है। इसके पूर्व उनका राजनीतिक अनुभव राज्यसभा एवं लोकसभा सदस्य के रूप में सिमटा रहा। कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद उनके कद को पार्टी ने और भी बड़ा कर दिया। दारा चौहान मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के सिधारी थाना क्षेत्र के गेलवारा गांव के रहने वाले हैं और इनकी शिक्षा दीक्षा भी आजमगढ़ से ही हुई है। आजमगढ़ डीएवी डिग्री कालेज से वह स्नातक हैं।
राजनीति के क्षेत्र में मऊ जनपद ही इनका प्रमुख केंद्र रहा है। पहली बार वर्ष 1996 में बहुजन समाज पार्टी से यह राज्यसभा के लिए चुने गए। यह कार्यकाल तीन वर्ष चार माह का था। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्हें दुबारा राज्यसभा भेेजा गया। समाजवादी पार्टी से यह 2002 में घोसी लोकसभा से चुनाव भी लड़े लेकिन हार गए। इसके बाद फिर बसपा में वापसी कर लिए। बसपा से यह 2009 में घोसी लोकसभा क्षेत्र से फिर चुनाव लड़े और चुनाव जीत गए।
बसपा ने इन्हें लोकसभा में संसदीय दल का नेता भी बनाया। इसके बाद फिर 2014 में भी बसपा से घोसी लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन मोदी लहर में यह दो लाख से अधिक मत पाकर चुनाव हारे। विधानसभा चुनाव से पहले इन्होंने फिर भाजपा का दामन थामा। भाजपा में इन्हें पिछड़ा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, साथ ही आखिरी दौर में मधुबन विधानसभा से इन्हें टिकट भी दे दिया गया। जबकि दारा सिंह चौहान यहां से टिकट की दौड़ में शामिल भी नहीं थे। मधुबन से चुनाव जीतने के बाद से ही इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाए जाने को लेकर चर्चा चल रही थी। जो रविवार को संपन्न हुए शपथ ग्रहण समारोह में फलीभूत भी हो गया।