नगर क्षेत्र के सहादतपुरा स्थित स्टेट बैंक पर एटीएम पर पैसा निकालने के लिए लगी लोगों की लंबी कतार।
ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार एवं 500 रुपये के नोट को बंद करने के चलते लोगों का जीवन नारकीय सा हो गया है। लोग अपने ही रुपयों के लिए कई किलोमीटर से आकर बाजार में लाइन लगा रहे हैं। बावजूद उनकी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही हैं।
दुबारी निवासी रहमान की बेटी की शादी है। वे रुपये के लिए बैंक पर लाइन लगा रहा है लेकिन उसे रुपये नहीं मिल रहे हैं। उसे चिंता है कि बेटी की शादी के लिए जरूरी सामान कैसे खरीदेगा। कैसे इज्जत संभलेगी। बात कुरेदते ही वह मंगलवार को फफक-फफक कर रो पड़ा। कुछ ऐसी ही हालत फतहपुर मंडाव बाजार में लाइन में लगे कई लोगों की थी। इनमें अधिकांश लोगों का घर बाजार से पांच से लेकर सात किलोमीटर दूर है। वह पैसे के लिए इतने दूर से आकर जलालत झेल रहे हैं।
बहोरन पुर निवासी मुन्ना ने बताया कि 16 नवंबर को उसके घर शादी है। वह तीन दिनों से लाइन में लगा रहे हैं लेकिन फिर भी इनके हाथ में फूटी कौड़ी नहीं आई। उन्हें चिंता खाए जा रही है कि कैसे होगी शादी के सारी तैयारी। लाइन में लगी नेमडाड़ निवासी सोनी पत्नी राजनाथ कहती हैं कि जेठ की दो दिन पहले मौत हो गई है।
मृतक संस्कारों के लिए कई दिनों से लाइन लगा रही हूं लेकिन आज तक बैंक से रुपये नहीं मिले। भवानी सराय निवासी रामप्रीत और फतहपुर निवासी अमरजीत का भी हाल कमोवेश यही रहा। यूबीआई मर्यादपुर, बैंक आफ इंडिया पहाडीपुर में भी भारी संख्या में लोग रुपयों के लिए लाइन में लगे रहे। बैंकों में अव्यवस्था का आलम यह रहा कि शुरूआती घंटों में ही एक हजार पांच सौ के नये नोट समाप्त हो गए।
बैंकों ने कोई विशेष इंतजाम भी नहीं किया। जिससे खाता धारकों का गुस्सा सातवें आसमान पर रहा। बैंकों पर लाइन लगाए कोई भी शख्स ऐसा नहीं रहा जो बहुत जरूरी काम से रुपये निकालने न आया हो।