दारा सिंह चौहान मौका देखकर पाला बदलते रहे हैं। एक भाजपा नेता ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें लगा कि प्रदेश में सपा की सरकार बन रही है, इसलिए वन मंत्री का पद छोड़ दिया। इस्तीफा देकर सपा में चले गए। अब पता चला कि सपा की सरकार नहीं बनेगी। भाजपा की राजनीति लंबी चलेगी, इसलिए इस्तीफा देकर भाजपा में आना चाहते हैं। केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं।
दारा सिंह चौहान मूलरूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं। शुरूआती राजनीति बसपा से की और लंबी पारी खेली। बसपा ने पहली बार 1996 में उन्हें राज्यसभा भेजा। 2000 में दोबारा राज्यसभा का प्रतिनिधित्व दिया। 2009 में घोसी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया और जीतकर वह नई दिल्ली पहुंच गए। 2014 के चुनाव में दोबारा बसपा के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2015 में वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें पिछड़ा वर्ग मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। 2017 के चुनाव में मऊ की मधुबन विधानसभा सीट से टिकट दिया, जहां से 30 हजार से अधिक वोटों से जीत कर वह प्रदेश सरकार में मंत्री बने।