दुबारी/दोहरीघाट। नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा था। जलस्तर बढ़ने से दोहरीघाट और मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा के तटवर्ती गांवों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। दोनों क्षेत्रों के 15 से अधिक गांवों में 150 से ज्यादा किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि फसलें पूरी तरह बर्बाद होने की स्थिति में हैं। ऐसे में खेती में लगी लागत तक निकालना मुश्किल होगा। सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है, जिन्होंने फसलों के साथ अपने मवेशियों के लिए हरे चारे की खेती की थी। चारा पानी में डूब जाने के बाद ग्रामीण रोजाना जान जोखिम में डालकर नाव से चार से पांच किलोमीटर दूर जाकर मवेशियों के लिए हरा चारा ला रहे हैं।
जलस्तर बढ़ने के बाद किसानों की समस्याओं का जायजा लेने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम शनिवार सुबह मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा के गाजियापुर, छावनी और कुंवरपुरवा पहुंची। इसके बाद दोहरीघाट के नई बाजार क्षेत्र का भी जायजा लिया गया। गाजियापुर में पांच ग्रामीण नाव से हरा चारा लेकर लौटते दिखाई दिए। इनमें चितरंजन पासवान, भगेलू समेत अन्य ग्रामीण शामिल थे। पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से उनकी फसलें डूब गई हैं। मवेशियों के लिए हरा चारा लेने के लिए उन्हें ऐसे स्थानों तक नाव से जाना पड़ रहा है, जहां अभी नदी का पानी नहीं पहुंचा है।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन-चार दिनों में सरयू का पानी गाजियापुर, बरोहा, कुंवरपुरवा, परसिया जयरामगिरि, सीहुलिया और चौहानपुर समेत कई तटवर्ती गांवों के रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। खेतों में खड़ी धान, गन्ना, बाजरा और बजरी की फसल के साथ हरा चारा भी पानी में डूब गया है। वहीं, दोहरीघाट क्षेत्र के नई बाजार, सरहरा और नवली गांव के खेतों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां 50 से अधिक किसानों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं।
दुबारी। बाढ़ से फसलें बर्बाद होने के साथ पशुओं के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरयू का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को चारे के लिए परेशान होना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि सब्जी की खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है। फसल बर्बाद होने से उन्हें दोहरा नुकसान होता है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर मुआवजा दें।
दुबारी। मधुबन तहसील के धर्मपुर विशुनपुरा गांव में देवरिया के बरहज में बने मोहन सेतु पुल के पास लगातार कटान होने से परसिया के साथ मऊ के धर्मपुर विशुनपुरा में लगातार कटान हो रही है। इसके बावजूद जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, अब वैकल्पिक तरीके से कटान रोकने की कोशिश की जा रही है। केबिनेट मंत्री एके शर्मा और जिलाधिकारी आनंद वर्धन बीते 15 अगस्त को इस क्षेत्र का निरीक्षण भी कर चुके हैं।
रुपये लगाकर जो फसल बोई गई थी पानी हटने के बाद उसका खराब होना तय है। हम अपनी आंखों से अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख रहे हैं। सतिराम यादव निवासी गाजियापुर
बाढ़ से हमें आर्थिक दिक्कत तो हो ही रही है। चारे की जद्दोजहद के बीच कीड़े-मकोड़े, मच्छरों के प्रकोप से बचना भी बड़ी चुनौती है।-केसर मौर्य, गजियापुर
500 से अधिक किसानों का फसल इस समय डूब चुकी है। किसानों का बड़ा नुक़सान है।लेकिन प्रशासन के लोग अब भी केवल निगाह रखे हैं। रामसरीख यादव, गजियापुर
सरयू नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जरूरी सुविधाएं बहाल की जा रही हैं। फसल क्षति का आकलन कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।-प्रवेंद्र कुमार, एडीएम, मऊ
सरयू नदी का जलस्तर स्थिर, खतरा बरकरार
दोहरीघाट। कस्बा स्थित सरयू नदी का जलस्तर शनिवार को स्थिर रहा, लेकिन खतरा बरकरार है। नदी खतरा निशान 69.90 मीटर से 50 सेमी ऊपर बह रही थी। शनिवार को गौरीशंकर घाट पर नदी का जलस्तर 70.40 मीटर रहा। नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते श्मशान घाट की सीढि़यां डूबने के साथ ही चतूबरा पर पानी भरा है। नदी के खतरे निशान से ऊपर बहने से मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, डीह बाबा का मंदिर, शाही मस्जिद तथा हनुमान मंदिर पर खतरा बढ़ गया है।
दोहरीघाट में बढ़ा सरयू नदी का जलस्त, डूबी श्मशान घाट की सीढियां।संवाद