अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो आदिल आफताब ने दलित व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या के मामले में नामजद दोषी पाए गए तीन दोषियों को सुनवाई के बाद मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 43-43 हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही अर्थदंड जमा हो जाने पर 80 प्रतिशत धनराशि मृतक इंद्रदेव के वारिसानों को देने का आदेश दिया। मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है ।
मामले के अनुसार, वादी मुकदमा अनिल कुमार गौड़ की तहरीर पर 14 जून 2004 को रिपोर्ट दर्ज हुई । वादी का कथन था कि उसके बाबा इंद्रदेव गौड़ भैंस चराने के लिए गए थे। उसी दौरान मुकदमेबाजी की रंजिश को लेकर तिघरा नई बस्ती गांव निवासी वीर बहादुर यादव पुत्र राजबली, रामसिंगार यादव और राम जतन यादव पुत्रगण वीरबहादुर ने इंद्रदेव को लाठी डंडे से मारपीट कर घायल किया और इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाद आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया था। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद वीरबहादुर यादव, राम सिंगार यादव और रामजतन यादव को पिछले मंगलवार को दलित व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या, धमकी और गाली देने के मामले में दोषी पाया था।
सजा पर एसपीओ धर्मेंद्र तिवारी और बचाव के अधिवक्ता को सुनने के बाद एडीजे ने तीनों को एससीएसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा के साथ बीस-बीस हजार रुपया अर्थदंड, गैरइरादतन हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही बीस-बीस हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही गाली देने के मामले में एक-ए्क वर्ष की सजा के साथ ही एक-एक हजार रुपया अर्थदंड तथा धमकी के मामले में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही दो-दो हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर क्रमश: दो माह व चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।