शस्त्र लाइसेंस, पासपोर्ट, चरित्र प्रमाण-पत्र, पोस्टमार्टम या पुलिस से मिलने वाली कोई भी रिपोर्ट मांगने पर विभाग ज्यादातर मामलों में सार्थक प्रतिक्रिया देने की जगह रुआब ही दिखाता है।
जनहित गारंटी अधिनियम-2011 के तहत रिपोर्ट मांगने वाला शिकायत करता भी है तो उसकी कहीं सुनवाई नहीं होती है। शासन ने इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इन पर नजर रखने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की है।
जो संबंधित शिकायतों और आवेदनों की प्रगति देखते हुए आमजन को पुलिसिया रुआब से मुक्ति भी दिलाएंगे। आख्या-सुझाव डीजीपी को देंगे।
सभी विभागों को जनहित गारंटी अधिनियम-2011 के तहत विभिन्न कार्यों एवं सेवाओं के लिए निश्चित समय सीमा का प्रावधान है। लेकिन पुलिस विभाग में इसका अनुपालन नहीं हो पाता है।
थाने का मामला हो या पुलिस अधीक्षक कार्यालय का हर जगह लोगों को पुलिस के रुआब का भी सामना करना पड़ता है।
डीजीपी कार्यालय से इस समस्या के समाधान के लिए सभी जिलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है जो पुलिस विभाग से संबंधित मामलों में इस अधिनियम का पालन सुनिश्चित कराएंगे।
इसकी प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के साथ ही इसका कड़ाई से अनुपालन भी कराएंगे। किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर वह अपनी आख्या अथवा सुझाव डीजीपी कार्यालय को देंगे।
अपर पुलिस महानिदेशक भ्रष्टाचार निवारण संगठन उत्तर प्रदेश को मऊ जनपद के साथ ही कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।