जनपद में अवैध शराब कारोबार दशकों से फल फूल रहा है। अवैध शराब पर रोक लगा पाने में पुलिस और आबकारी विभाग केवल खानापुर्ती भर करते हैं। ईंट भट्ठों पर कच्ची शराब बनाने वाले आदिवासी मजदूरों और छोटे मोटे कारोबारियों को पकड़कर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा देती है। आबकारी विभाग की कोई कार्रवाई जिले में कहीं दिखती नहीं है। यह तो महज संयोग है कि हाल के कई सालों में अवैध शराब से किसी की मौत नहीं हुई है।
जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार होता है। दोहरीघाट और मधुबन थाना क्षेत्र के देवारांचल के दुरूह इलाकों में अवैध शराब की भट्ठियां पूरे साल धधकती रहती हैं। इन क्षेत्रों में बनने वाली शराब जिलेभर में पहुंचती हैं। इसके अलावा भी कई बड़े अवैध शराब कारोबारी बाहर से शराब मंगाकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई करते हैं। इनमें से एक बर्खास्त सिपाही भी जनपद में अवैध शराब का काफी बड़ा कारोबारी है। इसी प्रकार सरायलखंसी थाना क्षेत्र के एक गांव का शराब कारोबारी भी बड़े पैमाने पर इस धंधे में लिप्त पाया गया है। हालांकि पुलिस ने इसे दो बार गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। लेकिन जमानत पर आने के बाद यह फिर से उसी धंधे में लिप्त हो जाता है। इस बाबत अपर पुलिस अधीक्षक एसके श्रीवास्तव का कहना है कि अवैध शराब पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। कई थानों की पुलिस ने अच्छे परिणाम भी दिए हैं।
इनसेट
लगभग आठ साल पहले मधुबन कस्बे में रहने वाले एक युवक की मौत अवैध शराब पीने से हो गई थी। यह युवक कस्बे में चिकित्सा व्यवसाय से जुडे़ एक व्यक्ति का रिश्तेदार था। इसी प्रकार घोसी कोतवाली क्षेत्र के अमिला और बोझी क्षेत्र के दो व्यक्तियों की मौत भी शराब के सेवन से हो गई थी। अमिला क्षेत्र की औरतों ने इसे लेकर आंदोलन चलाया था। लेकिन इधर के सालों में अवैध शराब के सेवन से कोई मौत नहीं हुई है। वही राजस्थान सहित दूसरे प्रांतों से आने वाली दो ट्रक अंग्रेजी शराब मुखबिर की सूचना पर स्वाट पुलिस ने पिछले साल पकड़ा है।