मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो वीरनायक सिंह ने दलित उत्पीड़न के मामले में नामजद बगेदू राजभर को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद एकवर्ष का कठोर कारावास के साथ एक हजार रुपया अर्थदंड की सजा का निर्णय सुनाया। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार चंद्रापार गांव निवासी हरिलाल जैसवार पुत्र बरसाती की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें पिऊवाताल गांव निवासी बगेदू राजभर पुत्र तेरसी राजभर को आरोपी बनाया। वादी का आरोप था कि 12 अप्रैल 2009 को उसका लड़का प्रिंस और अंकित , अजय आदि खेल रहे थे। आरोपी ने बच्चों को चप्पल से मारापीटा तथा ताड़ के पेड़ में बाध दिया, तथा एक कमरे में बंद करके जलाने जा रहा था। आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। शोर पर लोगों बच्चों को झुड़ाया। पीड़ित ने सीजेएम कोर्ट में आरोपी के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया। सुनवाई के बाद सीजेएम ने आरोपी बगेदू को धारा 323, 342 व 504 भादवि तथा तीन ( एक ) 10 एससीएसटी एक्ट में विचारण के लिए तलब किया। आरोपी के कोर्ट में हाजिर होने के बाद पत्रावली सत्र न्यायालय में भेजी गई। सत्र न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एसपीओ छेदीलाल गुप्ता ने कुल छह गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी बगेदू राजभर को दोषी पाते हुए मारपीट, गाली और बंधक बनाने में छह-छह माह की सजा तथा एससीएसटी एक्ट में एक वर्ष का कठोर कारावास की सजा के साथ ही एक हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया।