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कागजी न्याय करती है कोर्ट

Sun, 26 Jul 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में रविवार को वनदेवी धाम के प्रांगण में न्यायपालिका की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने सुलह-समझौते के आधार पर मुकदमों के निस्तारण पर बल दिया । कहा कि कोर्ट कागजी न्याय करती है। 
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अपने संबोधन में जिला जज सीएम दीक्षित ने कहा की लोग कसम खाने के बाद भी अदालतों में झूठी गवाही देते हैं, जिससे कभी-कभी दोषियों के साथ निर्दोष को भी सजा मिल जाती है। क्योंकि हम लोग कागजी न्याय करते हैं, वास्तविक न्याय नहीं । कहा कि जज पत्रावली में जो साक्ष्य आता है, उसी के आधार पर निर्णय करता है।


उन्होंने ने लोगों से अपने चरित्र में सुधार लाने की सलाह दी। जिला जज ने अदालतों में धारा 156 तीन के तहत बढ़ते प्रार्थना पत्रों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सही  है कि थानों पर छोटे मामलों की रिपोर्ट आसानी से दर्ज नहीं होती है,
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लेकिन  सही मामलों को ही अदालत में लाने की सलाह दी । कहा कि जिले में 75 हजार से अधिक मामले लंबित है। जितनी संख्या में जज चाहिए उतने नहीं है। एडीजे राजीव गोयल ने कहा कि जन समस्याओं के निदान के लिए हर जिले में विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यरत है।


जहां बिना न्यायालय में मुकदमा दाखिल किए  प्री-लेटिगेशन के  माध्यम से मामलों का निस्तारण करा सकते हैं। प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज  सीनियर डिवीजन प्रमोद कुमार सिंह ने प्राधिकरण की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देते हुए लोगों से सुलह समझौता के आधार पर मुकदमों के निस्तारण पर बल दिया। सीजेएम अली रजा ने कहा कि हर व्यक्ति मिल बैठकर समस्या का समाधान कर सकता है।


 अगर ऐसा हो जाय तो न्यायालय तक आने की जरूरत नहीं पडे़गी। कार्यक्रम में एडीजे डॉ. अजय  कुमार, डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना, एडीजे लालमणि प्रसाद, एडीजे धर्मेंद्र  कुमार पांडेय, मुंसिफ सदर राहुल दूबे, जेएम प्रवींद्र कुमार, मुंसिफ  मुहम्मदाबादगोहना अचल प्रताप सिंह, एजेएम जयहिंद कुमार सिंह लोग आदि लोग उपस्थित रहे।
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