मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अली रजा ने 25 वर्ष पूर्व चार लाख 80 हजार रुपये के घोटाले के मामले में आरोपी तत्कालीन ट्रेजरी आफिसर राजकुमार सोनार व लिपिक राजमंगल सिंह को दोषी पाया।
दोनों को चार-चार वर्ष की सजा के साथ ही 50-50 हजार रुपये अर्थदंड का निर्णय सुनाया। मामला 1993 में प्रकाश में आने पर इस संबंध में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था।
पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमे के अनुसार 1993 में तत्कालीन राजकुमार सोनार व रोकड़िया राजमंगल सिंह दो करोड़ 72 लाख 80 हजार 800 रुपये का स्टांप गोरखपुर से मऊ के लिए रिसीव किए।
इसमें से चार लाख 80 हजार का स्टांप गायब कर दिए। शासन के निर्देश पर अपराध अनुसंधान विभाग इंसपेक्टर भगवान सिंह ने जांच की। जांच में पाया कि चार लाख 80 हजार का स्टांप दोनों ने गबन कर लिया।
इंसपेक्टर भगवान सिंह ने दोनों के विरुद्ध शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसमें अपराध अनुसंधान के इंसपेक्टर सुरेंद्र प्रताप ने विवेचना कर आरोप पत्र प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से 18 गवाह पेश हुए थे। दोनों पक्षों के तर्कों के सुनने के बाद सीजेएम ने राजकुमार और राजमंगल को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दोनों आरोपियों को चार- चार वर्ष की सजा और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाया।