देश की आजादी के इतिहास में जिले के महान स्वतंत्रता सेनानियों झारखंडेय राय और जय बहादुर सिंह का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। केवल उनकी मूर्तियों का अनावरण ही काफी नहीं है, उनके बताए रास्ते पर चलना असली श्रद्धांजलि होगी। देश से ऊंच-नीच, अगड़ी-पिछड़ी का भेद खत्म करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन बुराइयों को दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों के पदचिह्नों पर चलकर खत्म किया जा सकता है।
ये विचार हैं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के। वे सोमवार की दोपहर मऊ में स्वतंत्रता सेनानियों झारखंडेय राय और जय बहादुर सिंह की मूर्तियों का अनावरण करने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिले के लिए यह गौरव की बात है कि इस धरती पर झारखंडेय राय और जय बहादुर सिंह जैसी विभूतियों ने जन्म लिया। ये दोनों महान हस्तियां किसी मामूली घर की नहीं थीं।
वे जमींदार परिवार के थे। इसके बाद भी जमींदारी प्रथा का विरोध करना बड़ी बात है। वे गरीबों, मजलूमों और किसानों के मसीहा थे। उन महान हस्तियों की प्रतिमाओं का अनावरण कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूूूस कर रहा हूं। इसके लिए उन्होंने भाकपा के राष्ट्रीय अतुल कुमार अनजान को धन्यवाद भी दिया।
इसके पहले स्वागत संबोधन में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने दोनों कम्युनिस्ट नेताओं की प्रतिमाओं का अनावरण करने के लिए मऊ आने पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
उन्होंने जिले के लिए कई मागें भी रखीं। इनमें दो बड़ी मांगें थीं हलधरपुर के पास कृषि विश्वविद्यालय और बच्चों के लिए बड़े अस्पताल और ट्रामा सेंटर। मुख्यमंत्री ने अनजान की मांगों को उचित बताते हुए इसे पूरा करने का भरोसा दिया।
समारोह को सपा के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय, कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने भी संबोधित किया। जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव ने मुख्यमंत्री तथा सपा सुप्रीमो मुुलायम सिंह यादव का स्वागत किया। कार्यक्रम में जिले के दोनों विधायकों सुधाकर सिंह और बैजनाथ पासवान के अलावा आसपास के जिलों के विधायक और कई मंत्री मौजूद थे।