शहर के एक स्कूल के बाहर खड़ी स्कूली बस का हाल।
जिले में खटारा स्कूली बसों का संचालन धड़ल्ले से जारी है। इन बसों के संचालन से बच्चों की सुरक्षा को खतरा रहता है। विभागीय अभिलेखों में 185 स्कूल बसें तथा 248 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। जबकि नियम के विपरीत अधिकांश स्कूल संचालकों द्वारा स्टाफ वाहनों में भी बच्चों को ढोया जाता है। इस बार मानक पूरे न होने पर विभाग की तरफ से 23 स्कूली बस संचालकों को नोटिस जारी की गई है।
जिले में 542 निजी स्कूल हैं। आए दिन बच्चों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी जिले में ओवरलोड स्कूली वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रही है। इसे लेकर, अभिभावक और प्रशासन भी गंभीर नहीं है। दो वर्ष पूर्व रानीपुर ब्लाक के महासो में स्कूली बस ट्रेन से टकरा गई थी। इस रेल हादसे ने लोगों को झकझोर दिया था। लेकिन न तो प्रशासन और न ही विभाग ने कोई सबक लिया। स्टाफ ढोने वाले वाहनों पर ही बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है। नियम के विपरीत 15 वर्ष पुरानी बसें भी सड़कों पर दौड़ रही है। विभाग की तरफ से मात्र अनफिट 23 बसों के संचालकों को नोटिस दी गई है। स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही अनुमन्य हैं। टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटे बड़े वाहन बच्चों को ढो रहे हैं। वह भी क्षमता से अधिक है।
स्कूली वाहनों में बच्चों को अतिरिक्त सीटें या बेंच लगाकर बैठाया जाता है। कई बार बच्चे वाहन के गेट पर भी बैठकर स्कूल आते-जाते दिख जाते हैं। सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार मौन रहते हैं। इस बाबत प्रभारी एआरटीओ रामसिंह यादव का कहना है कि अनफिट 23 संचालकों को नोटिस दी गई है। छोटे सवारी वाहन से स्कूली बच्चे ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे सवारी वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।