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बदहाल टापू हो गया है चक्की मूसाडोही गांव

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दुबारी के चक्की मूसा डोही गांव घाघरा नदी में आई बाढ़ से बना टापू। - फोटो : MAU
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मऊ। घाघरा नदी के टापू और जिले की सीमा के अंतिम छोर पर बसा चक्की मूसाडोही गांव इन दिनों बदहाल टापू सा हो गया है। चारों तरफ बाढ़ के पानी की सडांध, नदी की लहरों का डरावना शोर, दिन रात जलचर जीवों की गूंजती आवाजें ही रह गई हें। गांव की अस्सी फीसदी आबादी यानी ढाई सौ परिवार बाढ़ की विभीषिका देख पलायन कर गए हैं। पचास परिवार वैसे ही लोग बचे हैं जिनका कहीं ठौर नहीं है यह अपने घरों की छतों पर शरण लिए हैं। बुधवार को हुई नाव दुर्घटना में गांव के छह लोगों के मारे जाने के बाद यह गांव मातम के साए में है।
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गांव के तीन तरफ से घाघरा नदी बहती है। बाद के अलावा सामान्य दिनों में भी इस गांव में सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए बलिया और देवरिया जिलों की सीमा से होकर गुजरना पड़ता है। इस समय वह रास्ता भी टूट गया है। गांव में पहुंचाने के लिए दुबारी से बिंदटोलिया होते हुए नाव का ही सहारा लेना पड़ता है। बाढ़ में यहां पहुंच पाना बहुत ही मुश्किल भरा है। लेकिन इन भारी मुश्किलों के बीच चक्की मूसाडोही गांव के लोग जीवन यापन करते हैं। गांव में कुल 300 परिवार रहते हैं। एक महीने से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे गांव के लोग घर छोड़कर सुरिक्षत स्थान पर जाने लगे। प्रशासन की ओर से 23 नावें दी गई हैं। लेकिन नावों की कमी बताते हुए और नावों की मांग ग्रामीण करते रहे। गांव के राम लखन, शिवचंद, राम मनोहर, अजीत और राजेश तथा अरविंद कहते हैं कि प्रशासन उनकी मांगों को दरकिनार करता रहा। लोग अपने संसाधनों, विवेक और खुद नावों को खेकर सुरक्षित स्थानों को जाने लगे। इन गांव वालों का कहना है कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह गांव वालों को अपने संरक्षण में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाए। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। जिसका गांव वासियों को बहुत दुख है। एसडीएम लालबाबू दूबे दावा करते हैं कि गांव वालों को अपेक्षित संख्या में नावें दी गई हैं और नावों की व्यवस्था की गई है।
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